छत्तीसगढ़

Kerosene Supply : बड़ी खबर! अब चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर भी मिलेगा केरोसिन

PDS Kerosene : पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और एलपीजी (LPG) आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव (Kerosene Supply) को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। सरकार ने खाना पकाने के वैकल्पिक ईंधन के रूप में केरोसिन आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में 60 दिनों की विशेष ढील दी है। इस ऐतिहासिक बदलाव के तहत अब केवल राशन की दुकानों तक सीमित रहने वाला मिट्टी का तेल, जिले के दो चयनित पेट्रोल पंपों पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

नियमों में ढील और नई व्यवस्था

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को अब यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने नेटवर्क के भीतर चिन्हित पेट्रोल पंपों पर केरोसिन का स्टॉक रख सकें और उसे सीधे उपभोक्ताओं को वितरित कर सकें। केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) सुनिश्चित करने के लिए इन चयनित आउटलेट्स पर अधिकतम 5,000 लीटर तक मिट्टी का तेल रखने की अनुमति दी गई है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है और सरकार एलपीजी पर निर्भरता को कम करने के लिए बैकअप प्लान तैयार कर रही है।

राज्यों का ठंडा रुख और आवंटन की चुनौतियां

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। यह कोटा नियमित मासिक कोटे (लगभग 1 लाख किलोलीटर) के अतिरिक्त है। मंत्रालय ने राज्यों से स्पष्ट कहा है कि वे वितरण केंद्रों की पहचान करें और मुख्य रूप से राशन की दुकानों या इन नए निर्दिष्ट स्थानों के माध्यम से केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) को जमीन पर उतारें।

WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16 (1)
WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16

हालांकि, केंद्र की इस तत्परता के बावजूद राज्यों की ओर से प्रतिक्रिया काफी निराशाजनक रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:

WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (1)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (1)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (2)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 16.26.10
IMG-20260814-WA0019
IMG-20260815-WA0012
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260830-WA0020
IMG-20260814-WA0017
IMG-20260902-WA0013
IMG-20260815-WA0020
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260815-WA0019

अब तक केवल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ही एसकेओ (सुपीरियर केरोसिन ऑयल) के उठाव के लिए आवंटन आदेश जारी किए हैं।

हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों वाले राज्यों ने सीधे तौर पर इस कोटे को लेने से इनकार कर दिया है।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में भी प्रशासनिक स्तर पर हिचकिचाहट देखी जा रही है।

क्यों नहीं बढ़ रहा राज्यों का उत्साह

विशेषज्ञों का मानना है कि केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) को फिर से बहाल करना इतना आसान नहीं है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

उपकरणों का अभाव : पिछले एक दशक में ‘उज्ज्वला योजना’ की सफलता के कारण ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों ने केरोसिन स्टोव या लालटेन का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया है। राज्यों का तर्क है कि जब लोगों के पास स्टोव ही नहीं हैं, तो वे तेल का क्या करेंगे?

सीमित वितरण केंद्र : केंद्र ने प्रति जिला केवल दो पेट्रोल पंपों पर ही वितरण की अनुमति दी है। इतनी कम संख्या में वितरण केंद्रों के माध्यम से केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) को आम जनता तक पहुंचाना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।

अनिश्चित भविष्य : राज्य सरकारों को डर है कि यदि जनता एक बार फिर केरोसिन पर निर्भर हो गई और भविष्य में केंद्र ने इसकी सप्लाई बंद कर दी, तो यह एक राजनीतिक और सामाजिक संकट खड़ा कर सकता है।

केरोसिन मुक्त भारत अभियान को लगा झटका

हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार पिछले दस वर्षों से भारत को ‘केरोसिन मुक्त’ बनाने की दिशा में काम कर रही थी। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBTK) योजना के माध्यम से कई राज्यों को मिट्टी तेल का कोटा छोड़ने के बदले वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया। वर्तमान में देश के 21 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पूरी तरह से पीडीएस केरोसिन मुक्त घोषित किए जा चुके हैं।

वर्ष 2015-16 में जहां केरोसिन का वार्षिक आवंटन 86 लाख किलोलीटर था, वहीं 2023-24 में यह घटकर मात्र 10.60 लाख किलोलीटर रह गया। इसमें भी केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) का सबसे बड़ा हिस्सा (66%) अकेले पश्चिम बंगाल को मिलता है। ऐसे में अचानक से सप्लाई बढ़ाने का फैसला सरकार की “ऊर्जा सुरक्षा” की चिंता को दर्शाता है।

पश्चिम एशिया संकट और एलपीजी का गणित

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह अतिरिक्त केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) एक अस्थायी व्यवस्था है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बना रहता है। सरकार चाहती है कि यदि एलपीजी के आयात में कोई बाधा आए, तो गरीब परिवारों के पास खाना पकाने के लिए एक बैकअप ईंधन मौजूद रहे।

फिलहाल, गेंद राज्यों के पाले में है। जहां एक तरफ केंद्र सरकार राशन कार्डधारकों को रोशनी और खाना पकाने के लिए केरोसिन आपूर्ति (Kerosene Supply) के माध्यम से राहत देना चाहती है, वहीं राज्यों की सुस्त तैयारी और बुनियादी ढांचे की कमी इस योजना के सामने एक बड़ी दीवार बनकर खड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या आम जनता पेट्रोल पंपों की कतार में केरोसिन के लिए खड़ी होती है या नहीं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button