क्राइमछत्तीसगढ़

Excise Department Raid : अवैध शराब छापेमारी में सिर्फ 5 लीटर की बरामदगी का खेल, जानिए कमाई का पूरा गणित

Chhattisgarh News : मदिरा शुष्क दिवस के आदेश के बीच प्रदेशभर में अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी (Excise Department Raid) की कार्रवाई तेज कर दी गई है। शासन के निर्देशानुसार 4 मार्च को छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में देशी, विदेशी और कंपोजिट मदिरा दुकानों को पूर्णतः बंद रखने के आदेश जारी किए गए।

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आदेश के तहत देशी मदिरा दुकान (सीएस-2 घघ), कंपोजिट मदिरा दुकान, विदेशी मदिरा दुकान (एफएल-1 घघ कंपोजिट) तथा उनसे जुड़े अहातों को बंद रखा गया। इस दौरान शराब के विक्रय, विनिर्माण, संग्रहण, धारण और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया। जिला स्तरीय उड़नदस्तों को सक्रिय रहने और संदिग्ध स्थानों की जांच के निर्देश भी जारी किए गए। कागजों में यह पूरी कार्रवाई अवैध शराब के खिलाफ सख्त अभियान (Excise Department Raid) के रूप में पेश की जा रही है।

हालांकि जब इन कार्रवाइयों के आंकड़ों पर नजर डाली जाती है तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। अधिकांश मामलों में बरामद अवैध शराब की मात्रा 5 लीटर से कम बताई जा रही है। यह स्थिति केवल एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जिलों से ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। सवाल उठता है कि क्या पूरे प्रदेश में अवैध कारोबार इतनी छोटी मात्रा में ही हो रहा है, या फिर कार्रवाई (Excise Department Raid) के दौरान बरामदगी को सीमित दिखाया जा रहा है?

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जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का नेटवर्क गांव-गांव तक फैला हुआ है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में छोटी मात्रा की जब्ती अधिक दिखाई देना संदेह को जन्म देता है। यहां कानूनी पहलू महत्वपूर्ण हो जाता है।

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Excise Department Raid इस तरह होती है अवैध कमाई

छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत यदि 5 लीटर से कम अवैध शराब बरामद होती है तो सामान्यतः धारा 34(1) के तहत मामला दर्ज किया जाता है। यह धारा अपेक्षाकृत कम गंभीर मानी जाती है और कई मामलों में जमानती होती है। इसके विपरीत अधिक मात्रा मिलने पर धारा 34(2) जैसी कठोर धाराएं लागू हो सकती हैं। ऐसे में बरामदगी (Excise Department Raid) के दौरान मात्रा का निर्धारण बेहद अहम हो जाता है।

कानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि वास्तविक बरामदगी 10 या 15 लीटर हो और दस्तावेजों में उसे 2 या 3 लीटर दर्शा दिया जाए, तो मामला स्वतः हल्का हो जाता है। इससे आरोपी को जमानत मिलने में आसानी होती है। यही वह बिंदु है जहां अवैध शराब के खिलाफ की जा रही छापामार कार्रवाई (Excise Department Raid) की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।

एक्साइज से ज्यादा पुलिस सक्रिय

प्रदेश में यह भी देखने को मिलता है कि स्थानीय पुलिस कई बार आबकारी विभाग से अधिक सक्रिय नजर आती है। जबकि अवैध शराब पर नियंत्रण की मूल जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। फिर भी आंकड़ों में पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही (Excise Department Raid) अधिक दिखाई देती है। इससे विभागीय समन्वय और जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा तेज हो जाती है।

त्योहारी सीजन, चुनाव या शुष्क दिवस जैसे अवसरों पर अचानक तेज हुई सख्ती और उसके बाद सामान्य दिनों में ढील यह पैटर्न भी संदेह पैदा करता है। यदि अवैध कारोबार व्यापक है, तो फिर नियमित और व्यापक स्तर पर अभियान (Excise Department Raid) क्यों नहीं दिखाई देता?

ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विक्रेताओं को पकड़कर 2 से 5 लीटर की बरामदगी दिखाना आसान होता है। इससे आंकड़े तो बन जाते हैं, लेकिन सप्लाई चेन के बड़े नेटवर्क तक शायद ही कार्रवाई पहुंचती हो। कई जानकारों का दावा है कि बड़ी मछलियां अक्सर बच निकलती हैं, जबकि छोटे स्तर के लोग कानूनी प्रक्रिया में फंस जाते हैं।

सवाल यह भी है कि क्या जांच प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी होती है? जब जांच कार्रवाई (Excise Department Raid) की रिपोर्ट तैयार होती है, तब बरामद मात्रा की पुष्टि किस स्तर पर होती है? यदि इसमें पारदर्शिता न हो, तो न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

अब आवश्यकता है कि केवल कागजी उपलब्धियों से आगे बढ़कर वास्तविक और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। यदि सरकार सचमुच अवैध शराब के खिलाफ सख्ती चाहती है तो प्रत्येक छापेमारी कार्रवाई (Excise Department Raid) की निगरानी, वीडियो रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्था लागू करनी होगी।

 

 

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