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Organised Crime Network Database : अब चाल-ढाल और शारीरिक बनावट से भी होगी अपराधियों की पहचान

Raipur News : अपराधियों की पहचान अब केवल फिंगरप्रिंट (Organised Crime Network Database) तक सीमित नहीं रहेगी। उनकी चाल-ढाल, शारीरिक बनावट और चेहरे के हाव-भाव भी पुलिस के लिए पहचान का आधार बनेंगे। इसके लिए संगठित अपराध नेटवर्क डाटाबेस (ओसीएनडी) को लागू किया गया है। जेल पहुंचते ही आरोपित का बायोमेट्रिक, डीएनए सहित विस्तृत डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसे जेल विभाग पुलिस और गृह विभाग के साथ साझा करेगा।

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इस डाटाबेस (Organised Crime Network Database) में यह जानकारी भी दर्ज रहेगी कि आरोपित कब जेल से रिहा हुआ, कब उसे जमानत मिली, उससे मिलने कौन आया और वह कितनी बार आपराधिक मामलों में पकड़ा गया। पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संगठित अपराध नेटवर्क डाटाबेस का शुभारंभ किया था, जिसके तहत देशभर में सक्रिय गैंगस्टरों और उनके आतंकी नेटवर्क से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं।

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अब पहचान के लिए बाल और रक्त के नमूनों का भी उपयोग किया जाएगा। आरोपित का डीएनए यूनिक कोड के साथ डाटाबेस में सुरक्षित रहेगा। किसी वारदात स्थल से बाल या खून मिलने पर उसका मिलान कर अपराधी की पहचान संभव होगी।

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दोषसिद्धि में भी बनेगा मजबूत आधार

नई व्यवस्था से न सिर्फ अपराधियों की पहचान (Organised Crime Network Database) आसान होगी, बल्कि मामलों में दोषसिद्धि की दर भी बढ़ेगी। अकेले रायपुर में फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट यूनिट द्वारा करीब दो हजार अपराधियों का डाटा पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है। पूरे प्रदेश में अब तक लगभग 50 हजार अपराधियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है।

गौरतलब है कि हत्या, चोरी और अन्य गंभीर अपराधों में पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंचती है, खासकर जब अपराधी अज्ञात हो। अब तक घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट का मिलान पुराने रिकॉर्ड से किया जाता था, लेकिन अब जांच का दायरा कहीं ज्यादा विस्तृत हो गया है।

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आइरिस, चाल और कद-काठी तक रिकॉर्ड में शामिल

अब जिन आरोपितों को गिरफ्तार किया जा रहा है, उनके फिंगरप्रिंट के साथ आइरिस स्कैन, सामने और पीछे से फोटो, चलने का तरीका, शरीर की बनावट, लंबाई और अन्य शारीरिक माप एनसीआरबी द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर में दर्ज किए जा रहे हैं। इसके लिए पुलिस की फोरेंसिक एवं फिंगरप्रिंट यूनिट के अंतर्गत विशेष मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट गठित की गई है।

पुलिस अधिकारियों (Organised Crime Network Database) के अनुसार, अधिकांश संदिग्ध सीसीटीवी कैमरों में कैद हो जाते हैं। कई मामलों में चेहरा ढंका होता है और केवल आंखें या शरीर की बनावट दिखाई देती है। ऐसे में यह तकनीक अपराधियों की पहचान में बेहद कारगर साबित होगी। एक बार आरोपी का पूरा डाटा सिस्टम में दर्ज हो जाने के बाद, उसके दोबारा अपराध करने पर पहचान करना आसान होगा।

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