कृषि समाचार

Genda Farming : राष्ट्रीय बागवानी मिशन से गेंदे की खेती को बढ़ावा, प्रति एकड़ 2.07 लाख की शुद्ध आय

Genda Farming किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर लाभकारी उद्यानिकी फसलों से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सहायता दी जा रही है। इसी योजना के पुष्प क्षेत्र विस्तार घटक से गेंदे की खेती (Genda Farming) को बढ़ावा मिल रहा है। योजना के तहत खेती करने वाले किसानों को अनुदान के साथ आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर मिल रहा है। इससे खेती की लागत संभालते हुए बेहतर आमदनी का रास्ता खुला है।

 सेवा की कहानी : राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार घटक योजना से कुमारी ने गेंदे की खेती को अपनाया

योजना से मिली मदद, खेती बनी लाभकारी

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार घटक योजना के तहत गेंदे की खेती (Genda Farming) अपनाने वाले किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसी के तहत वर्ष 2025-26 में 0.64 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदे की फसल लेने के लिए 12 हजार 800 रुपये का अनुदान डीबीटी के माध्यम से दिया गया। योजना के साथ आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने से किसानों को बेहतर उत्पादन और आय की उम्मीद बढ़ी है। ड्रिप सिंचाई और कृषि यंत्रों का इस्तेमाल खेती के प्रबंधन को आसान बनाने के साथ उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी मदद कर रहा है।

 

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प्रति एकड़ 2.07 लाख रुपये की शुद्ध आय

योजना का लाभ लेकर गेंदे की खेती (Genda Farming) करने वाले किसान ने बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर प्रति एकड़ लगभग 2 लाख 7 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित की। खेती में आधुनिक तकनीक और सिंचाई सुविधा का इस्तेमाल इस आय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा। सफलता का यह उदाहरण बताता है कि पारंपरिक धान की खेती के साथ किसान फूल और अन्य उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी आमदनी के विकल्प बढ़ा सकते हैं।

 

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महासमुंद की कुमारी चंद्राकर ने अपनाई खेती

महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम भदरसी की कृषक कुमारी चंद्राकर के पास कुल 0.64 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। परंपरागत रूप से धान की खेती में अधिक लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन को देखते हुए उन्होंने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया। वर्ष 2025-26 में उन्होंने योजना के तहत गेंदे की खेती (Genda Farming) शुरू की।  कुमारी चंद्राकर ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रिप सिंचाई एवं कृषि यंत्रों की मदद से फसल तैयार की। बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर उन्हें प्रति एकड़ लगभग 2 लाख 7 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।

 

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धनिया, प्याज और बैंगन भी उगा रहीं

कुमारी चंद्राकर अब गेंदे की खेती (Genda Farming) के साथ कई अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती भी कर रही हैं। वे प्रतिवर्ष धनिया, प्याज, बैंगन, मूली और भाजी जैसी फसलें ले रही हैं। इससे उनकी खेती में विविधता आई है और अलग-अलग फसलों से आमदनी के अवसर भी बढ़े हैं। उनकी खेती को देखकर रिश्तेदारों और आसपास के किसानों में भी उद्यानिकी फसलों को अपनाने के प्रति रुचि बढ़ रही है। इस तरह एक किसान की सफलता आसपास के दूसरे किसानों को भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।

 

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वैज्ञानिक खेती से बढ़ सकती है किसानों की आय

कुमारी चंद्राकर की सफलता यह दिखाती है कि सरकारी योजना की सहायता, सिंचाई सुविधा और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल कर किसान उद्यानिकी फसलों को लाभकारी बना सकते हैं। गेंदे की खेती (Genda Farming) जैसे विकल्प किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ अतिरिक्त आय का अवसर देते हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से पुष्प क्षेत्र विस्तार को मिल रहा प्रोत्साहन ऐसे किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है, जो कम क्षेत्र में अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ना चाहते हैं।

 

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