Elephant Calf Death छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल वन परिक्षेत्र अंतर्गत सारसमार गांव में दल से बिछड़े हाथी के बच्चे की दलदल में फंसने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते निगरानी और बचाव के प्रयास किए जाते, तो हाथी के बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। छाल रेंज में लगातार हाथियों और अन्य वन्यजीवों की मौतों से स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में नाराजगी है। उनके मुताबिक, क्षेत्र में अब तक 13 से ज्यादा हाथियों और वन्यजीवों की मौत हो चुकी है।

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दल से बिछड़ने के बाद भी नहीं बची जान
रविवार और सोमवार की दरमियानी रात हाथियों के बड़े दल से एक बच्चा बिछड़ गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद वन विभाग का मैदानी अमला उसकी निगरानी करने का दावा कर रहा था। हालांकि, सोमवार को सारसमार के पास एक खेत में दलदल में फंसने से हाथी के बच्चे की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और छाल वन परिक्षेत्र अधिकारी की टीम हाथी के बच्चे को उसके दल से मिलाने और उसकी जान बचाने में नाकाम रही। उनका कहना है कि समय रहते मुस्तैदी दिखाई जाती, तो बच्चे को बचाया जा सकता था।
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छाल रेंज में वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल
छाल वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी और मैदानी अमले की लापरवाही के कारण क्षेत्र में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। हाथी के बच्चे की मौत (Elephant Calf Death) ने एक बार फिर वन विभाग की ट्रैकिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मौतों के कारणों और विभागीय लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
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शव लेकर जांच में जुटा विभाग
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने शव को कब्जे में लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू की। ग्रामीणों का कहना है कि केवल जांच की औपचारिकता पूरी करने के बजाय जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि यदि हाथी के बच्चे की निगरानी प्रभावी तरीके से की गई होती, तो उसे दलदल में फंसने से बचाया जा सकता था। सारसमार की घटना (Elephant Calf Death) के बाद क्षेत्र में हाथियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर जवाबदेही की मांग उठ रही है।
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