कृषि समाचार

Chhattisgarh Floriculture Scheme : किसान ने 4.83 हेक्टेयर में अपनाई फूल-सब्जियों की खेती, गेंदा उत्पादन पर मिल रही 37,500 रुपये की सहायता

Chhattisgarh Floriculture Scheme छत्तीसगढ़ में किसान पारंपरिक खेती के साथ फूल और सब्जियों का उत्पादन अपनाकर अपनी आय के नए अवसर तलाश रहे हैं। राजनांदगांव जिले के ग्राम मोहड़ निवासी किसान घनश्याम साहू ने फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना का लाभ लेकर एक हेक्टेयर में गेंदा फूल की खेती शुरू की है। वे कुल 4.83 हेक्टेयर भूमि में विभिन्न उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना (Chhattisgarh Floriculture Scheme) के तहत व्यावसायिक पुष्प उत्पादन के लिए एक हेक्टेयर पर 37 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।

सेवा की कहानी : फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना से घनश्याम साहू की खेती को मिली नई दिशा

घनश्याम साहू गेंदा फूल के साथ खीरा, मिर्च, कुंदरू और लौकी की खेती भी कर रहे हैं। अलग-अलग फसलें अपनाने से उन्हें बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने का अवसर मिल रहा है। योजना का उद्देश्य किसानों को पुष्प उत्पादन और उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर कृषि को अधिक व्यावसायिक बनाना है।

 

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4.83 हेक्टेयर में फूल और सब्जियों का उत्पादन

राजनांदगांव विकासखंड के किसान घनश्याम साहू एक हेक्टेयर में गेंदा फूल, 1.62 हेक्टेयर में खीरा, 0.81 हेक्टेयर में मिर्च, 0.40 हेक्टेयर में कुंदरू और एक हेक्टेयर में लौकी की खेती कर रहे हैं। इस तरह वे कुल 4.83 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।

फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना के तहत एक हेक्टेयर में व्यावसायिक फूलों की खेती करने पर 37 हजार 500 रुपये की सहायता का प्रविधान है। गेंदा फूल की खेती पर अनुदान (Chhattisgarh Floriculture Scheme) मिलने से किसानों को पुष्प उत्पादन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

 

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स्थानीय बाजार में फूल और सब्जियों की मांग

घनश्याम साहू के अनुसार, गेंदा फूल की मांग धार्मिक, सामाजिक और अन्य आयोजनों में बनी रहती है। वहीं खीरा, मिर्च, कुंदरू और लौकी जैसी सब्जियां स्थानीय बाजारों में बिकती हैं। अलग-अलग फसलों की खेती से किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने और आय के कई स्रोत विकसित करने में मदद मिलती है।

वे भूमि की तैयारी, पौधरोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा कीट और रोग प्रबंधन पर ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय जलवायु, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनने से खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है। राजनांदगांव में उद्यानिकी खेती (Chhattisgarh Floriculture Scheme) को बढ़ावा देने में ऐसी पहल उपयोगी साबित हो सकती है।

 

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फसल विविधीकरण से बढ़ेंगे आय के अवसर

घनश्याम साहू की खेती दर्शाती है कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ फूल और सब्जियों का उत्पादन भी अपना सकते हैं। फसल विविधीकरण से बाजार की जरूरत के अनुसार खेती करने और उत्पादन के नए विकल्प विकसित करने का अवसर मिलता है।

राज्य सरकार की योजना के माध्यम से किसानों को व्यावसायिक पुष्प उत्पादन के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। छत्तीसगढ़ में फूलों की खेती के लिए सहायता (Chhattisgarh Floriculture Scheme) किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने की पहल का हिस्सा है।

 

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