कृषि समाचार

Chhattisgarh Agriculture : हरी खाद-नीलहरित शैवाल से मिट्टी बनेगी मजबूत, किसानों की लागत होगी कम

Chhattisgarh Farmer News : लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग ने हमारे खेतों (Chhattisgarh Agriculture) की कोमलता छीन ली है। मिट्टी अब सख्त और कम उपजाऊ होती जा रही है, जिससे खेती की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस संकट से निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने अब ‘हरी खाद’ और ‘नील-हरित शैवाल’ (Blue Green Algae) को किसानों के लिए सबसे बड़ा हथियार बताया है। कृषि विभाग का दावा है कि यह तकनीक न केवल मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारेगी, बल्कि यूरिया और डीएपी जैसे महंगे रसायनों पर किसानों की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर देगी।

कृषि वैज्ञानिकों का यह मानना है कि खेत (Chhattisgarh Agriculture) में डालो हरी खाद, मिट्टी बनेगी फौलाद केवल एक स्लोगन नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि की बुनियाद है। हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा और लोबिया जैसी दलहनी फसलों का चुनाव किया जा सकता है। ये फसलें वायुमंडल से नाइट्रोजन खींचकर मिट्टी में जमा करती हैं, जिससे खेत को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है।

मिट्टी में जान फूंकती है जैविक शक्ति

विशेषज्ञों के मुताबिक, हरी खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में ‘ऑर्गेनिक कार्बन’ की मात्रा बढ़ती है। इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और उसकी जलधारण क्षमता (Water Retention Capacity) में सुधार होता है। परिणाम स्वरूप, कम सिंचाई में भी फसलें लहलहाने लगती हैं। किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इससे यूरिया की खपत में 25 से 30 प्रतिशत तक की भारी कमी आती है।

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तैयार करने की सरल विधि

कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मई-जून के महीनों में ढैंचा या सनई की बुवाई करना सबसे उपयुक्त है। जब फसल करीब 45 से 50 दिनों की हो जाए और उसमें फूल आने शुरू हों, तब उसे खेत (Chhattisgarh Agriculture) में ही हल चलाकर दबा देना चाहिए। इसके बाद दो सप्ताह तक उसे गलने के लिए छोड़ दें और फिर मुख्य फसल की रोपाई करें। यह प्रक्रिया मिट्टी को प्राकृतिक पोषक तत्वों से लबरेज कर देती है।

धान की फसल के लिए नील-हरित शैवाल का जादू

छत्तीसगढ़ के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों के लिए नील-हरित शैवाल किसी वरदान से कम नहीं है। इसके उपयोग से प्रति हेक्टेयर लगभग 25 से 30 किलो नाइट्रोजन की प्राकृतिक रूप से पूर्ति हो जाती है। यह न केवल धान की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करता है, बल्कि मिट्टी के बंजरपन को दूर करने में भी सहायक है। इसकी लागत रसायनों के मुकाबले नगण्य है, जो छोटे किसानों की जेब पर बोझ कम करती है।

उपयोग का तरीका Chhattisgarh Agriculture

धान की रोपाई के 3-4 दिन बाद खेत में 10 से 12 किलो शैवाल पाउडर का छिड़काव करें। ध्यान रहे कि अगले 10 दिनों तक खेत (Chhattisgarh Agriculture) में पानी जमा रहे, ताकि शैवाल सक्रिय होकर अपना असर दिखा सके। कृषि विभाग की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित और खेती को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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