Abujhmad Rice : अबूझमाड़ का अरक चावल पहुंचा विधानसभा, दीदियों के पारंपरिक स्वाद ने जीता जनप्रतिनिधियों का दिल

By admin
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Abujhmad Rice

अबूझमाड़ का अरक चावल (Abujhmad Rice) अब छत्तीसगढ़ विधानसभा तक पहुंच गया है। विधानसभा परिसर में आयोजित विशेष खाद्य प्रदर्शनी में नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र की पारंपरिक खाद्य संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। यहां स्व-सहायता समूह की दीदियों (Self Help Group) द्वारा तैयार किए गए अरक चावल से बनी खीर और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद जनप्रतिनिधियों ने चखा और इसकी जमकर सराहना की। इस आयोजन ने जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कृषि उत्पादों और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) को नई पहचान दिलाई।

अरक चावल की खुशबू ने सबका मन मोह लिया

प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण अबूझमाड़ का पारंपरिक अरक चावल (Abujhmad Rice) रहा। हल्के पीले रंग और प्राकृतिक सुगंध के लिए प्रसिद्ध इस चावल से तैयार की गई खीर का स्वाद मंत्रियों, विधायकों और अन्य अतिथियों को बेहद पसंद आया। जनप्रतिनिधियों ने इसे छत्तीसगढ़ की दुर्लभ और अनमोल खाद्य विरासत बताते हुए इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

पारंपरिक खेती की पहचान बना अरक चावल

अरक चावल (Arak Rice) बिना उबाले गए धान से तैयार किया जाता है। पारंपरिक खेती की पद्धति से तैयार होने वाला यह चावल अपने खिले हुए दानों, प्राकृतिक सुगंध और पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। पकने के दौरान इसकी भीनी-भीनी खुशबू पूरे वातावरण को महका देती है, जिससे इसकी अलग पहचान बनती है।

वनांचल से विधानसभा तक पहुंची परंपरा

अबूझमाड़ (Abujhmad Rice)  के दूरस्थ वनांचल से पारंपरिक व्यंजनों को विधानसभा तक पहुंचाने में वन मंत्री केदार कश्यप और नारायणपुर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन और प्रयासों से स्थानीय उत्पादों तथा जनजातीय खाद्य संस्कृति को राज्य स्तर पर पहचान मिली है। इस पहल को स्थानीय किसानों और महिलाओं के लिए भी बड़ा अवसर माना जा रहा है।

Abujhmad Rice महिला समूहों को मिला नया मंच

इस आयोजन के माध्यम से स्व-सहायता समूह की दीदियों (Self Help Group) को अपनी पारंपरिक कला और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। महिलाओं ने बताया कि यदि स्थानीय उत्पादों को उचित मंच और बाजार मिले तो वनांचल की पारंपरिक विरासत राष्ट्रीय स्तर तक अपनी अलग पहचान बना सकती है। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल से अबूझमाड़ (Abujhmad Rice) के पारंपरिक कृषि उत्पादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय किसानों, महिला समूहों और जनजातीय समुदायों को बाजार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।


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