कृषि समाचार

Ginger Farming in Chhattisgarh : धान छोड़ अदरक की खेती से बढ़ाएं कमाई, प्रति एकड़ 15 हजार रुपये प्रोत्साहन का प्रविधान

Ginger Farming in Chhattisgarh किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए राज्य में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने का प्रविधान है। अदरक की खेती (Ginger Farming in Chhattisgarh) जैसे विकल्प किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आमदनी के नए रास्ते तलाशने का अवसर देते हैं।

रायपुर : सेवा संकल्प अभियान-2026: सेवा की कहानी : धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़े किसान मुकंदर सिंह, अदरक और अरहर की खेती से आजीविका संवारने की नई पहल

धान पर निर्भरता कम कर अदरक, अरहर, दलहन और तिलहन जैसी फसलें अपनाने से किसान अपनी जमीन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। कृषि विभाग किसानों को फसल चयन और खेती की तकनीक के संबंध में मार्गदर्शन दे रहा है। सही फसल का चुनाव और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती (Ginger Farming in Chhattisgarh) किसानों के लिए अतिरिक्त उपज और आमदनी की संभावनाएं बढ़ा सकती है।

 

यह भी पढ़ें : Bilaspur School Girls Protest : कलेक्टर को गेट पर बुलाने की जिद पर अड़ी छात्राएं, कलेक्ट्रेट में हंगामा

WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16 (1)
WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16
Apex-hospital

सरगुजा में किसान ने अपनाया खेती का नया तरीका

सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम दरिमा निवासी किसान मुकंदर सिंह, पिता बरातु सिंह, ने इस खरीफ सीजन में पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर करीब डेढ़ एकड़ में अदरक लगाया है। इसके साथ ही खेतों की मेड़ों पर अरहर की खेती की है। कृषि विभाग के अधिकारियों से फसल विविधीकरण और कृषक उन्नति योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने यह प्रयोग किया। फिलहाल दोनों फसलों की बढ़वार अच्छी है और उन्हें बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। यह पहल (Ginger Farming in Chhattisgarh) दूसरे किसानों को भी वैकल्पिक फसलों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित कर सकती है।

 

यह भी पढ़ें : Urvashi Rautela Ambikapur : अंबिकापुर में गरबा नाइट में शामिल होंगी बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला

 

डेढ़ एकड़ में अदरक, मेड़ों पर अरहर

मुकंदर सिंह पहले अपने खेतों में धान की खेती करते थे। इस वर्ष खरीफ फसल की बुआई से पहले दरिमा समिति में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें वैकल्पिक फसलों के फायदे बताए। अधिकारियों ने अरहर, तिलहन और अन्य फसलों की खेती के साथ योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी भी दी। इसके बाद उन्होंने पिछले वर्ष धान के लिए इस्तेमाल की गई जमीन पर अदरक लगाने का निर्णय लिया।

किसान ने करीब डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की और खेतों की खाली मेड़ों पर कृषि विभाग से मिले अरहर के बीज लगाए। उनका कहना है कि दोनों फसलों की बढ़वार अच्छी है। उन्हें उम्मीद है कि अदरक की पैदावार के साथ अरहर से मिलने वाली अतिरिक्त उपज परिवार की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी। अदरक की खेती (Ginger Farming in Chhattisgarh) में रुचि रखने वाले किसानों के लिए स्थानीय कृषि विभाग से मिट्टी, बीज और तकनीक संबंधी सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

 

यह भी पढ़ें : Yuvraj Singh Delhi Capitals : IPL में सिक्सर किंग युवराज सिंह की धमाकेदार एंट्री, इस टीम की बदलेंगे किस्मत!

 

प्रोत्साहन राशि की जानकारी से बढ़ा भरोसा

मुकंदर सिंह के अनुसार, दरिमा समिति में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने का प्रविधान है। इस जानकारी ने उन्हें नई फसल अपनाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, योजना का लाभ निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार ही मिलेगा।

किसान का कहना है कि खेती में बदलाव करते समय नई फसल के उत्पादन और संभावित जोखिम को लेकर चिंता रहती है। ऐसे में योजनाओं की जानकारी और कृषि विभाग का मार्गदर्शन निर्णय लेने में मदद करता है। अदरक की खेती (Ginger Farming in Chhattisgarh) अपनाने से पहले किसानों को बाजार की मांग, उत्पादन लागत और फसल की देखभाल का आकलन करना चाहिए।

 

यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Bus Fare Hike : प्रदेश में यात्री बसों का किराया बढ़ा, साधारण बस में पांच किमी के लिए 10 रुपये

 

फसल विविधीकरण से खेती को मिलेगा नया विकल्प

कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसान धान के साथ दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर बढ़ सकते हैं। इससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने और एक ही फसल पर निर्भरता घटाने की संभावना बनती है। हालांकि, किसी भी फसल को अपनाने से पहले स्थानीय मिट्टी, पानी, मौसम, बाजार की मांग और उत्पादन लागत का आकलन जरूरी है।

दरिमा के किसान मुकंदर सिंह ने अदरक और अरहर की खेती के जरिए फसल विविधीकरण की पहल की है। अब उनकी नजर बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त आमदनी पर है। छत्तीसगढ़ में अदरक की खेती (Ginger Farming in Chhattisgarh) करने की योजना बना रहे किसानों को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विभाग से सलाह लेकर ही फसल का चयन करना चाहिए।

 

यह भी पढ़ें :  Elephant Calf Death : दल से बिछड़े हाथी के बच्चे की दलदल में फंसकर मौत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button