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MGNREGA Balrampur Success Story : खेत की प्यास बुझी तो किसानों के चेहरे खिले: मण्डपपारा में मनरेगा कूप ने घोल दी जिंदगी में मिठास

Farmer Welfare : छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में जब विकास की धारा पहुँचती है, तो उसकी चमक किसानों (MGNREGA Balrampur Success Story) की आँखों में साफ देखी जा सकती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन के दौर में ग्रामीण विकास की सरकारी योजनाएं अब फाइलों से निकलकर खेतों की मेड़ तक पहुँच रही हैं। इसका सबसे शानदार नजारा बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत रामनगरकला के मण्डपपारा में देखने को मिलता है, जहाँ एक अदद कुएँ ने पूरे इलाके की खेती का मिजाज ही बदल दिया है।

वो दिन जब पानी के लिए तरसते थे खेत

मण्डपपारा की कहानी कुछ साल पहले तक संघर्षों से भरी थी। पथरीली जमीन और नीचे गिरते जल स्तर ने यहाँ के किसानों की कमर तोड़ दी थी। सिंचाई सुविधा (MGNREGA Balrampur Success Story) न होने की वजह से किसान सिर्फ साल में एक बार धान की फसल ले पाते थे, वो भी अगर इंद्रदेव की कृपा रही तो। गर्मी शुरू होते ही यहाँ सन्नाटा पसर जाता था क्योंकि सिंचाई का कोई स्थायी साधन नहीं था। ग्रामीणों को छोटे-छोटे गड्ढों और झिरिया के पानी से गुजारा करना पड़ता था।

सुमंत की जिद और ग्राम सभा का साथ

बदलाव की इस कहानी के नायक हैं सुमंत हालदार। उन्होंने हार नहीं मानी और ग्राम सभा में अपनी आवाज बुलंद की। सरकारी योजनाओं (MGNREGA Balrampur Success Story) का लाभ लेने के लिए उन्होंने कूप निर्माण की मांग रखी। गाँव वालों ने भी उनका साथ दिया और प्रस्ताव पारित हो गया। प्रशासन ने भी देर नहीं की और 2.98 लाख रुपए की मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो गया। देखते ही देखते मनरेगा के तहत वह कूप तैयार हो गया, जो आज पूरे मण्डपपारा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

पसीने से सींचा रोजगार और भविष्य

खास बात यह रही कि इस कूप को बनाने में बाहर के लोग नहीं, बल्कि गाँव के ही हाथ लगे थे। इस योजना (MGNREGA Balrampur Success Story) के जरिए गाँव के लोगों को 492 दिनों का रोजगार मिला, यानी निर्माण के वक्त भी घर में पैसा आया और बनने के बाद तो आमदनी का रास्ता ही खुल गया। आज यह कूप लगभग ढाई एकड़ जमीन की प्यास बुझा रहा है। 8 किसान परिवारों की किस्मत अब इस कूप के मीठे पानी से जुड़ी हुई है।

जब मेहनत रंग लाई और जेब में आए ‘लाख’

सिंचाई सुविधा (MGNREGA Balrampur Success Story) का असर सुमंत हालदार के खेत में साफ दिखता है। सुमंत बताते हैं कि पहले वो सिर्फ धान लगाकर बैठ जाते थे, लेकिन अब नज़ारा अलग है। कूप बनने के बाद उन्होंने हिम्मत दिखाई और मक्का के साथ-साथ आलू की खेती शुरू की। जब फसल कटी और बाजार पहुँची, तो उनकी मेहनत का मीठा फल उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये के मुनाफे के रूप में मिला। सुमंत के चेहरे की मुस्कान बताती है कि अब उन्हें अपनी बेटियों की पढ़ाई या घर के खर्चों के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है।

खेतों में लौटी हरियाली, बढ़ा हौसला

अब मण्डपपारा के किसान सिर्फ खेती नहीं कर रहे, बल्कि वे नए प्रयोग कर रहे हैं। सिंचाई सुविधा (MGNREGA Balrampur Success Story) बढ़ने से अब यहाँ के खेतों में बारह महीने हरियाली रहती है। गाँव के अन्य किसान भी अब सुमंत की राह पर चलते हुए सब्जी उत्पादन की तैयारी कर रहे हैं। सरकार की इन जमीनी योजनाओं (MGNREGA Balrampur Success Story) ने गाँव के युवाओं को भी यह भरोसा दिलाया है कि अगर साधन हों, तो खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सबसे सम्मानजनक पेशा है।

आत्मनिर्भरता की नई इबारत MGNREGA Balrampur Success Story

बलरामपुर का यह छोटा सा गाँव आज पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन गया है। यह साबित हो गया है कि अगर सुशासन (MGNREGA Balrampur Success Story) का इरादा नेक हो और किसान का श्रम साथ हो, तो बंजर जमीन से भी सोना उगाया जा सकता है। मण्डपपारा का यह कूप अब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हजारों उम्मीदों का संगम बन चुका है।

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