छत्तीसगढ़

Dolomite Mine Public Hearing  : जनसुनवाई या ‘डेथ वारंट’….! प्रशासन ने महज 60 मिनट में लगाई मुहर

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील अंतर्गत कटंगपाली-जोतपुर क्षेत्र को ‘श्मशान की राख’  (Dolomite Mine Public Hearing ) में तब्दील करने की पटकथा मंगलवार को बोंदा में पूरी आक्रामकता के साथ लिख दी गई। यह विकास की जनसुनवाई नहीं, बल्कि इलाके की आने वाली पीढ़ियों के फेफड़ों का सौदा था, जिसे जिला प्रशासन और खनिज माफिया के नापाक गठबंधन ने महज़ एक घंटे की ‘कागजी नौटंकी’ में अंजाम दे दिया।

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आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स जोतपुर द्वारा अपनी डोलोमाइट खदानों के क्षमता विस्तार के लिए आयोजित जनसुनवाई (Dolomite Mine Public Hearing )  में जिस तरह ‘प्रायोजित जनसमर्थन’ जुटाया गया, उसने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। पीठासीन अधिकारी व सारंगढ़ एसडीएम वर्षा बसंल की मौजूदगी में, बिना किसी शोर-शराबे और पुलिस बल के, जिस ‘शांतिपूर्ण’ तरीके से इस ज़हरीली परियोजना को मंज़ूरी दी गई, वह साबित करता है कि विरोध की हर आवाज़ को पहले ही मैनेज कर लिया गया था।

सत्ता और पैसे की हवस Dolomite Mine Public Hearing

जनसुनवाई (Dolomite Mine Public Hearing )  शुरू होते ही ‘ग़द्दारी’ का सिलसिला शुरू हुआ। ग्राम पंचायत बोंदा के सरपंच गोवर्धन निषाद ने सबसे पहले मंच पर पहुंचकर क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण की बलि चढ़ा दी। उन्होंने तर्क दिया कि खदान विस्तार से रोजगार मिलेगा और विकास होगा। सवाल यह है कि क्या डोलोमाइट की धूल फांककर मिलने वाला रोजगार, सिलिकोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज कर पाएगा? सरपंच के पीछे-पीछे 35 अन्य लोगों ने लिखित में और लगभग 150 लोगों ने मौखिक रूप से इस ‘विनाशकारी’ परियोजना को अपना समर्थन दे दिया, जैसे वे मौत का वारंट साइन कर रहे हों।

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विरोधियों के सुर रुपयों की खनक में बदले

सबसे चौंकाने वाला और घिनौना पहलू उन लोगों का रहा जो अब तक खदानों के कड़े विरोधी थे। बोंदा के सुरेन्द्र सिंह सिदार जिनके स्वर पहले विरोधाभासी थे, मंगलवार को अचानक बदल गए। उनके इस ‘यू-टर्न’ ने पूरी जनसुनवाई को संदिग्ध बना दिया है।

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क्षेत्र में चर्चा आम है कि क्या खनिज माफिया (Dolomite Mine Public Hearing) ने इन विरोधियों के मुंह नोटों की गड्डियों से बंद कर दिए हैं? कल तक जो लोग प्रदूषण पर सवाल उठा रहे थे, आज वे माइक पर आकर केवल ‘सुझाव’ देने लगे कि पानी का छिड़काव करा देना। यह क्षेत्र की जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है।

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एसडीएम ने 1 घंटे में निपटाया खेल Dolomite Mine Public Hearing

सारंगढ़ एसडीएम वर्षा बसंल और पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू की भूमिका एक मूकदर्शक से ज़्यादा ‘फसिलिटेटर’ (सुविधा प्रदान करने वाले) की रही। महज एक घंटे में सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं। कोई गंभीर आपत्ति न आने पर एसडीएम ने तुरंत जनसुनवाई समापन की घोषणा कर दी, मानो वे खुद इस डील को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती थीं। यह जनसुनवाई नहीं, बल्कि प्रशासन की मदद से खनिज माफिया द्वारा क्षेत्र पर किया गया कब्जा था।

अब सरिया का बच्चा-बच्चा फांकेगा डोलोमाइट की राख

इस कथित ‘जनसमर्थन’ (Dolomite Mine Public Hearing )  के बाद, आर्यन मिनरल्स अब 4.961 हेक्टेयर की उपजाऊ भूमि को ज़हर उगलने वाली खदान में बदल देगा। कटंगपाली से जोतपुर तक अब केवल डोलोमाइट की सफेद, जानलेवा राख उड़ेगी। स्कूल के बच्चे, अस्पताल के मरीज़ और खेत के किसान सब इस ‘श्मशान की राख’ के नीचे दबने के लिए अभिशप्त हैं। प्रशासन ने माफिया के साथ मिलकर सरिया क्षेत्र के विनाश पर अंतिम मुहर लगा दी है।

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