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Timarlaga Illegal Mining Mastermind  : ‘कुर्सी’ और ‘कमीशन’ का खेल, आखिर किसका ‘हाथ’ है टिमरलगा केजीएफ पर

Mining Mafia : टिमरलगा के ‘केजीएफ’  (Timarlaga Illegal Mining Mastermind ) का खेल अब केवल पोकलेन और हाईवा तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब एक ‘कॉर्पोरेट वार’ में तब्दील हो चुका है, जहाँ खून और पसीने की नहीं, बल्कि ‘पावर’ और ‘पैसे’ की बोली लगती है। एपिसोड-3 में हम उन चेहरों को बेनकाब करेंगे जो माइनिंग माफिया (Mining Mafia) के असली सूत्रधार हैं। टिमरलगा की ये अवैध खदानें दरअसल एक एटीएम मशीन बन चुकी हैं, जिसका पिन कोड उन ‘सफेदपोशों’ के पास है जो जनता के प्रतिनिधि बनकर सत्ता के शीर्ष पर बैठे हैं।

सत्ता के दलाल और माइनिंग माफिया (Mining Mafia)

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, टिमरलगा में सक्रिय माइनिंग माफिया (Mining Mafia) का हर महीने का ‘टर्नओवर’ लगभग 50 करोड़ से ऊपर का है। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा ‘प्रोटेक्शन मनी’ के रूप में उन लोगों तक पहुँचता है, जिनके पास जांच रोकने की ताकत है। रायपुर के पॉश इलाकों में स्थित कुछ आलीशान बंगलों की दीवारों में इस अवैध खनन की गूँज साफ सुनी जा सकती है।

क्या यह महज इत्तेफाक है कि जब भी माइनिंग विभाग की टीम टिमरलगा की ओर निकलती है, तो बीच रास्ते में ही उन्हें ‘ऊपर’ से फोन आ जाता है? यह ‘ऊपर’ वाला व्यक्ति कौन है? क्या यह जिला स्तर का अधिकारी है या राजधानी का कोई कद्दावर नेता? माइनिंग माफिया (Mining Mafia) ने सिस्टम को इतना खोखला कर दिया है कि आज ईमानदारी की बात करने वाले अफसरों को ‘सजा’ के तौर पर दूर-दराज के इलाकों में फेंक दिया जाता है।

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ब्लड लाइमस्टोन,  पत्थरों पर है मासूमों के खून के निशान

टिमरलगा के ग्रामीण आज खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। माइनिंग माफिया (Mining Mafia) द्वारा बिना किसी सुरक्षा मानकों के की जा रही ‘अंधाधुंध ब्लास्टिंग’ ने गांवों के मकानों में दरारें डाल दी हैं। धूल का ऐसा गुबार छाया रहता है कि छोटे बच्चों के फेफड़ों में ‘सिलिकोसिस’ जैसी जानलेवा बीमारियां घर कर रही हैं। लेकिन जब गांव वाले आवाज उठाते हैं, तो उन्हें माइनिंग माफिया (Mining Mafia) के पाले हुए गुंडे डराते-धमकाते हैं।

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पुलिस विभाग की भूमिका भी यहाँ संदेहास्पद है। गांव वालों का कहना है कि जब वे शिकायत लेकर थाने जाते हैं, तो उन्हें ही उल्टा फंसाने की धमकी दी जाती है। आखिर खाकी वर्दी माइनिंग माफिया (Mining Mafia) के सामने इतनी मजबूर क्यों है? क्या पुलिस की गाड़ियां इन अवैध हाईवा को एस्कॉर्ट करने के लिए रखी गई हैं? यह साठगांठ अब टिमरलगा को एक ‘युद्ध क्षेत्र’ में बदल रही है।

अवैध खदानों की ‘बेनामी’ चैन Timarlaga Illegal Mining Mastermind

कागजों पर ये खदानें ‘बंजर जमीन’ या ‘चरागाह’ दर्ज हैं, लेकिन हकीकत में यहाँ माइनिंग माफिया (Mining Mafia) की समानांतर सरकार चलती है। जांच में पता चला है कि इन मशीनों के असली मालिक रायगढ़ के नामी कारोबारी हैं, जो दिन में ‘समाजसेवी’ होने का ढोंग करते हैं और रात में माइनिंग माफिया बनकर धरती का सीना चीरते हैं।

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इन माफियाओं ने अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए बेनामी संपत्तियों का जाल फैलाया है। टिमरलगा से निकले पत्थर के पैसों से रियल एस्टेट, लग्जरी होटल और विदेशों में निवेश किया जा रहा है। माइनिंग माफिया (Mining Mafia) ने एक ऐसी चैन बनाई है, जिसमें पत्थर खदान से निकलता है, क्रशर पर टूटता है और सरकारी सडकों के निर्माण में ही खपा दिया जाता है। यानी सरकार का ही पत्थर और सरकार का ही पैसा, लेकिन फायदा सिर्फ माइनिंग माफिया  को!

प्रशासनिक लकवा और ‘प्रोटोकॉल’ का नाटक

कलेक्टर और एसपी के पास सैकड़ों शिकायतें लंबित हैं, लेकिन माइनिंग माफिया (Mining Mafia) के रसूख के आगे फाइलों पर धूल जम रही है। विभाग का कहना है कि “कार्यवाही की प्रक्रिया लंबी है”, जबकि माइनिंग माफिया (Mining Mafia) के लिए खुदाई की प्रक्रिया बेहद छोटी और तेज है। माइनिंग माफिया ने टिमरलगा को प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर कर दिया है।

हाल ही में खनिज विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “अगर हम सख्ती करते हैं, तो हमारे परिवार को जान से मारने की धमकी मिलती है।” यह स्थिति स्पष्ट करती है कि माइनिंग माफिया (Mining Mafia) अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक ‘आतंकवादी संगठन’ की तरह काम कर रहा है। क्या शासन को इंतजार है कि कब टिमरलगा में कोई बड़ा नरसंहार हो।

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