कृषि समाचार

Mahanadi River Horticulture Farming : नदी किनारे के 152 गांवों में बदलेगा खेती का गणित, धान के साथ बढ़ेंगे आय के नए विकल्प

Mahanadi River Horticulture Farming नदी किनारे के गांवों में खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए अब जमीन की प्रकृति के अनुसार फसल प्रणाली तैयार की जा रही है। जलभराव वाली जमीन में धान को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि ऊंची और बेहतर जल निकासी वाली भूमि पर दलहन-तिलहन, सब्जी, औषधीय और फलदार फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

एक ही फसल पर निर्भरता कम कर किसानों के लिए आय के नए रास्ते तैयार करने की योजना है। भूमि की ऊंचाई, मिट्टी, जलभराव, जल निकासी और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर गांववार माइक्रो-प्लान तैयार किया जाएगा। बागवानी खेती (Mahanadi River Horticulture Farming) को भी इसी योजना का हिस्सा बनाया गया है।

152 गांवों में तैयार होगी नई खेती की योजना

धमतरी जिले में महानदी के किनारे 97, पैरी के किनारे 18, सोंढूर के किनारे 23 तथा खारून नदी के किनारे 14 गांव चिन्हित किए गए हैं। इन 152 गांवों के करीब 38 हजार किसान और 30,841.96 हेक्टेयर कृषि रकबा योजना से लाभान्वित होगा। महानदी क्षेत्र (Mahanadi River Horticulture Farming) में सितंबर-अक्टूबर से फसल विविधीकरण अभियान शुरू करने की कार्ययोजना है।

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जलभराव में धान, ऊंची जमीन पर बागवानी

अति निम्न और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान प्रमुख फसल रहेगी। इसके साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्यम ऊंचाई और मौसमी जलभराव वाली भूमि में धान के बाद कम अवधि की दलहन, तिलहन और सब्जियां लेने की योजना है।

ऊंची और बेहतर जल निकासी वाली जमीन में दलहन-तिलहन, सब्जी, औषधीय फसल और फलदार पौधों के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। बागवानी फसलों (Mahanadi River Horticulture Farming) से किसानों को धान के अलावा अतिरिक्त आय का विकल्प मिलेगा।

Mahanadi River Horticulture Farming 5,458 हेक्टेयर में प्रस्ताव

नदी किनारे के गांवों में रबी फसलों के लिए 5,458.90 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। इसमें चना 3,244.10, गेहूं 662.80, सरसों 472.50, मक्का 243.90, उड़द 214.80, मूंग 178.70, मूंगफली 142.20, सूरजमुखी 39 और औषधीय फसल 110.60 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। धान की कटाई के बाद रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने से कृषि रकबे का बेहतर उपयोग होगा। नदी किनारे की खेती (Mahanadi River Horticulture Farming) में फसल चयन को जमीन और पानी की उपलब्धता से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

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जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी खेती की क्षमता

फसल विविधीकरण के साथ जल संरक्षण पर भी विशेष जोर रहेगा। महानदी किनारे धमतरी और मगरलोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पॉण्ड, 17 सोकपिट तथा मगरलोड में सात चेकडैम/एमआइटी सुधार के कार्य प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 75 नदी तटवर्ती गांवों में तटीय घास और पौधरोपण किया जाएगा। खेत से नाले और नाले से नदी तक पानी के अनियंत्रित बहाव को रोकने के लिए माइक्रो-वाटरशेड आधारित कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

खेत में प्रदर्शन से किसानों को मिलेगा अनुभव

धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी में उड़द-मूंग, मूंगफली, रागी, सरसों, मक्का और चना जैसी फसलों के प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। इससे किसानों को खेत में ही वैकल्पिक फसलों के उत्पादन और उनसे होने वाले लाभ का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि नदी किनारे के क्षेत्रों में खेती की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। स्थानीय भू-आकृति और पानी की उपलब्धता के अनुरूप गांववार माइक्रो-प्लान तैयार कर फसल चयन किया जाना जरूरी है। फलदार पौधों की खेती (Mahanadi River Horticulture Farming) को बढ़ावा देने के साथ जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा, फसल प्रदर्शन और किसान प्रशिक्षण को जोड़कर ऐसी कृषि प्रणाली विकसित की जाएगी, जो वर्तमान के साथ भविष्य के लिए भी टिकाऊ हो।

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