कृषि समाचार

Pomato Farming : अब एक ही पौधे से उगेंगे आलू और टमाटर

Pomato Farming India : वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) कृषि के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लेकर आया है, जो कम जमीन वाले किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ग्राफ्टिंग तकनीक (Pomato Farming) के जरिए अब एक ही पौधे से दो-दो सब्जियां उगाई जा रही हैं, जिसे देखकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी प्रभावित नजर आए।

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खेती की लागत घटाने और सीमित संसाधनों में अधिकतम उत्पादन लेने के लिए ICAR-IIVR ने ग्राफ्टिंग तकनीक का सफल प्रयोग किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने संस्थान का दौरा कर इन नवाचारों को ‘स्मार्ट फार्मिंग का भविष्य’ बताया। वैज्ञानिकों ने दो अलग-अलग प्रजातियों के पौधों को जोड़कर इस तकनीक (Pomato Farming) में बड़ी सफलता हासिल की है।

पोमेटो और ब्रिमेटो का कमाल Pomato Farming

पोमेटो (Pomato): इसमें टमाटर और आलू के पौधों को ग्राफ्ट किया गया है। जमीन के ऊपर लाल टमाटर फलते हैं और उसी पौधे की जड़ों में मिट्टी के नीचे आलू उगते हैं। यह तकनीक (Pomato Farming) का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

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ब्रिमेटो (Brimato): इस तकनीक में बैंगन और टमाटर को एक ही पौधे में उगाया जा रहा है। एक ही डाल पर आपको बैंगन और टमाटर दोनों मिल सकते हैं, जो आधुनिक खेती (Pomato Farming) की नई दिशा दिखाता है।

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किसानों को क्या होगा फायदा

इस नई तकनीक से भूमि, पानी और पोषक तत्वों का 100% उपयोग संभव हो रहा है। एक ही खेत और एक ही मेहनत में दो फसलें मिल जाती हैं, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आती है। यह तकनीक (Pomato Farming) छोटे किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि वे आधी जगह में दोगुनी फसल ले सकेंगे।

इसके अलावा यह तकनीक मिट्टी जनित रोगों के प्रति अधिक सहनशील मानी जा रही है, जिससे फसल नुकसान का खतरा भी कम हो जाता है। ऐसे में यह खेती (Pomato Farming) भविष्य की टिकाऊ कृषि का मजबूत आधार बनती दिख रही है।

कृषि मंत्री के निर्देश Pomato Farming

समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन तकनीकों को केवल लैब तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जल्द से जल्द किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज और ग्राफ्टेड पौध किसानों को उपलब्ध कराए जाएं।

साथ ही किसानों को आधुनिक नर्सरी के जरिए तैयार पौधे दिए जाएं, ताकि उन्हें शुरुआत से ही बेहतर उत्पादन मिल सके। सरकार की इस पहल से यह तकनीक (Pomato Farming) तेजी से जमीन पर उतर सकती है और खेती में बड़ा बदलाव ला सकती है।

 

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