Kawardha Leopard Rescue : अस्पताल परिसर में पांच घंटे गुर्राता रहा तेंदुआ, महिला को किया घायल
अस्पताल परिसर में तेंदुआ घुसने की घटना (Kawardha Leopard Rescue) ने सोमवार को घंटों दहशत का माहौल बना दिया। पार्किंग में सुबह 10:51 बजे तेंदुआ दिखाई देने के बाद वह वाशरूम में जा छिपा। उसे देखने के लिए अस्पताल के बाहर हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। वन विभाग की टीम ने लोगों को पीछे हटाकर रेस्क्यू क्षेत्र को सुरक्षित किया।
इसी दौरान तेंदुए ने यशोदा बाई पर पंजा मारकर उन्हें घायल कर दिया। गनीमत रही कि चोट गंभीर नहीं थी और अस्पताल में ही उनका तत्काल उपचार कर दिया गया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद बिलासपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज कर पिंजरे में सुरक्षित किया। स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार के बाद देर रात उसे भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र के जंगल में छोड़ दिया गया।
सोमवार सुबह पुराने बस स्टैंड के पास स्थित स्नेहा अस्पताल की पार्किंग में तेंदुआ दिखाई दिया। सीसीटीवी फुटेज में वह ऊपरी हिस्से से सीढ़ियों के रास्ते पार्किंग में उतरता नजर आया। सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन सक्रिय हो गया। मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्पताल के भीतर आवाजाही सीमित कर दी गई। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने लगी।
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कवर्धा में अस्पताल के बाहर जुटी हजारों की भीड़
कवर्धा में अस्पताल परिसर में तेंदुआ होने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी। देखते ही देखते अस्पताल के बाहर हजारों लोग जमा हो गए। हर कोई तेंदुए की हलचल देखने की कोशिश कर रहा था। वन विभाग ने लोगों को पीछे हटाकर रेस्क्यू क्षेत्र को सुरक्षित किया। तेंदुआ पार्किंग से लगे वाशरूम में जा छिपा था और भीतर से लगातार उसके गुर्राने की आवाज सुनाई दे रही थी। मौके पर डीएफओ निखिल अग्रवाल और एसपी जितेंद्र यादव भी मौजूद रहे।
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महिला को पंजा मारकर किया घायल
तेंदुए की हलचल के दौरान यशोदा बाई उसकी चपेट में आ गईं। तेंदुए ने पंजा मारकर उन्हें घायल कर दिया। गनीमत रही कि चोट गंभीर नहीं थी। अस्पताल कर्मचारियों ने तत्काल महिला का उपचार किया। महिला के घायल होने की घटना (Kawardha Leopard Rescue) के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा और बढ़ा दी गई।
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बिलासपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम, किया ट्रैंक्विलाइज
तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए बिलासपुर से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद टीम ने तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज कर पिंजरे में सुरक्षित किया। डीएफओ निखिल अग्रवाल ने बताया कि तेंदुआ नर था और उसकी उम्र 5.5 वर्ष थी। नारायण ठाकुर सहित वन विभाग के कर्मचारियों ने रेस्क्यू में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेषज्ञ टीम की कार्रवाई (Kawardha Leopard Rescue) के बाद तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे में रखा गया।
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Kawardha Leopard Rescue देर रात भोरमदेव अभयारण्य में छोड़ा
रेस्क्यू के बाद तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार कराया गया। इसके बाद देर रात उसे भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार पूरे रेस्क्यू के दौरान लोगों की सुरक्षा और तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़ना प्राथमिकता रही। तेंदुए को प्राकृतिक क्षेत्र में वापस छोड़ने की कार्रवाई (Kawardha Leopard Rescue) के साथ रेस्क्यू अभियान पूरा हुआ।
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