बड़ी खबर

Holika Dahan 2026 : होली पर भद्रा का प्रभाव, जानिए होलिका दहन का सही शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Holi 2026 : रंगों का पावन पर्व होली (Holika Dahan 2026) हर वर्ष पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। होली से एक दिन पहले फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद होलिका पूजन किया जाता है और शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। मान्यता है कि इस अग्नि में व्यक्ति अपने अहंकार, नकारात्मकता और बुराइयों का त्याग करता है।

WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.08 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 16.26.10
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.09
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.06
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.08

इस वर्ष चंद्र ग्रहण और भद्रा काल के कारण होलिका दहन (Holika Dahan 2026) की तिथि और समय को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग 2 मार्च तो कुछ 3 मार्च को होलिका दहन करने की बात कर रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शास्त्रों में बताए गए शुभ मुहूर्त में पूजा करने से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं और ग्रहों से जुड़ी बाधाएं भी कम होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं होलिका दहन की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

Holika Dahan 2026 पूर्णिमा तिथि

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 02 मार्च 2026, सोमवार शाम 5 बजकर 18 मिनट से

WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16 (1)
WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 03 मार्च 2026, मंगलवार शाम 4 बजकर 33 मिनट तक

WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (1)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.05
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07 (1)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.08
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (2)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07 (2)

Holika Dahan 2026 भद्रा काल और शुभ मुहूर्त

भद्रा काल: 02 मार्च शाम 5 बजकर 18 मिनट से रात तक

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: 02 मार्च मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक

Holika Dahan 2026 होलिका पूजन सामग्री

पूजा के लिए एक लोटा जल, चावल, गंध, पुष्प, माला, रोली, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल और गेहूं की बालियां आदि सामग्री तैयार रखें।

इस विधि से करें होलिका पूजन

होलिका दहन से पहले होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

सबसे पहले भगवान गणेश और माता गौरी का पूजन करें।

इसके बाद होलिका के लिए “ॐ होलिकायै नमः”, भक्त प्रह्लाद के लिए “ॐ प्रह्लादाय नमः” और भगवान नृसिंह के लिए “ॐ नृसिंहाय नमः” मंत्र का जाप करें।

होलिका दहन के समय अग्नि में गेहूं की बालियां सेंककर प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

बड़गुल्ले की चार मालाएं लेकर पितरों, हनुमान जी, शीतला माता और परिवार की मंगलकामना के लिए अर्पित करें।

इसके बाद होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें।

परिक्रमा करते समय कच्चा सूत होलिका के चारों ओर लपेटने की परंपरा निभाई जाती है।

अंत में जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर धूप, गंध और पुष्प से विधिपूर्वक पूजा करें तथा अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हुए भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button