Domanlal Korsewada Death : अहिवारा के भाजपा विधायक डोमनलाल का निधन, 34 साल तक शिक्षक रहे, गुरुजी के नाम से मिली पहचान
- हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में ली अंतिम सांस, 22 दिनों से चल रहा था उपचार
- 2008 में अहिवारा के पहले विधायक बने, 2023 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे
Domanlal Korsewada Death छत्तीसगढ़ के दुर्ग अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का शुक्रवार दोपहर हैदराबाद में निधन हो गया। वे फेफड़ों में संक्रमण की समस्या से जूझ रहे थे और पिछले करीब 22 दिनों से हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती थे। इससे पहले रायपुर और दुर्ग में भी उनका उपचार कराया गया था। उनके निधन की खबर से अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर है। करीब 34 वर्षों तक शिक्षक रहे कोर्सेवाड़ा ने राजनीति में भी सादगी, सहज व्यवहार और जनसेवा को अपनी पहचान बनाया। विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन (Domanlal Korsewada Death) अहिवारा क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है।
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चाक-डस्टर से शुरू हुआ सफर, राजनीति तक बनाई पहचान
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का सार्वजनिक जीवन शिक्षा के क्षेत्र से शुरू हुआ था। जनवरी 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में शिक्षा विभाग में सेवा शुरू करने के बाद उन्होंने करीब 34 वर्षों तक विद्यार्थियों का भविष्य संवारा। शिक्षक के रूप में उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि लोग उन्हें स्नेह से ‘गुरुजी’ कहकर बुलाते थे। शिक्षा को वे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गढ़ने का माध्यम मानते थे। यही संवेदनशीलता उनके राजनीतिक जीवन में भी दिखाई दी।
राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने करीब 12 वर्षों तक पूर्व सांसद स्वर्गीय ताराचंद साहू के निज सहायक के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें जनसमस्याओं और क्षेत्रीय जरूरतों को करीब से समझने का अवसर मिला। ताराचंद साहू के मार्गदर्शन ने उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को आकार दिया। बाद में उन्होंने शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा की राजनीति में कदम रखा। गुरुजी से जनसेवक बने डोमनलाल (Domanlal Korsewada Death) ने शिक्षा के क्षेत्र से हासिल अनुभव को जनसेवा में लगाया।
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अहिवारा के पहले विधायक बने थे कोर्सेवाड़ा
वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई अहिवारा विधानसभा सीट से कोर्सेवाड़ा पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इस तरह वे नवगठित विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक बने। वर्ष 2013 में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और सांवलाराम डाहरे को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने पार्टी के फैसले को सहजता से स्वीकार किया और संगठन के साथ जुड़े रहे।
वर्ष 2018 में भी भाजपा ने डाहरे पर भरोसा जताया। इसके बाद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने फिर कोर्सेवाड़ा को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। विधायक नहीं रहने के दौरान भी क्षेत्र में उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं से संपर्क बना रहा। अहिवारा के पहले विधायक (Domanlal Korsewada Death) के रूप में उनका नाम क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास में दर्ज रहेगा।
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451 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों को दी प्राथमिकता
विधायक बनने के बाद कोर्सेवाड़ा ने अहिवारा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में क्षेत्र के लिए 451 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई। इनमें से अधिकांश कार्य पूरे होने का दावा किया गया। नंदनी में केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था।
राज्य सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने खैरागढ़, मानपुर, बालोद और गुंडरदेही सहित विभिन्न क्षेत्रों की विकास संबंधी मांगों के लिए राशि आवंटित कराने के प्रयास किए। डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का राजनीतिक सफर (Domanlal Korsewada Death) क्षेत्रीय विकास और जनसरोकारों से जुड़ा रहा।
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राष्ट्रपति के हाथों मिला था गुरु घासीदास सम्मान
कोर्सेवाड़ा को वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों गुरु घासीदास सम्मान से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2013 में उन्हें श्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार भी मिला। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा मिलने के बावजूद उनकी पहचान सहज व्यवहार और शालीनता से बनी रही। वे अपनी उपलब्धियों का श्रेय क्षेत्र की जनता, पार्टी कार्यकर्ताओं और मार्गदर्शकों को देते थे।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षा से अर्जित संवेदनशीलता और अनुशासन को उन्होंने जनसेवा में भी अपनाया। गुरुजी के नाम से लोकप्रिय विधायक (Domanlal Korsewada Death) के निधन से क्षेत्र ने ऐसा जनप्रतिनिधि खो दिया, जिसकी लोगों के बीच अलग आत्मीय पहचान थी।
परिवार में भी शिक्षा और जनसेवा की परंपरा
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर थे। उनकी पत्नी कमला कोर्सेवाड़ा दुर्ग जिला मंडी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके बेटे धनंजय कोर्सेवाड़ा गुंडरदेही जनपद पंचायत के सदस्य रहे। कोर्सेवाड़ा अपने राजनीतिक जीवन में स्वर्गीय ताराचंद साहू और डॉ. रमन सिंह के योगदान को महत्वपूर्ण मानते थे। वे अपनी सफलता का श्रेय क्षेत्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग को देते थे।
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