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DFO Office Commission Issue : डीएफओ ने निगला सेल्समैन का हक, 250 परिवारों के चूल्हे बुझाने की तैयारी

Baramkela News : ओडिशा बार्डर से लगे सुदूर वनांचल क्षेत्रों में सरकारी व्यवस्थाएं (DFO Office Commission Issue) किस कदर दम तोड़ रही हैं, इसका जीता जागता सबूत सारंगढ का वन विभाग है। एक तरफ सरकार गरीबों को मुफ्त राशन देने का ढिंढोरा पीटती है, तो दूसरी तरफ सारंगढ डीएफओ कार्यालय के अफसर एक गरीब राशन दुकान संचालक का हक मारकर बैठे हैं। पिछले तीन साल से वन समिति द्वारा संचालित राशन दुकान का कमीशन जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते अब बॉर्डर के सैकड़ों आदिवासी परिवारों के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है।

कुंभकर्णी नींद में सोया डीएफओ कार्यालय

मामला सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम खम्हरिया की शासकीय उचित मूल्य दुकान (DFO Office Commission Issue) वन समिति (क्रमांक- 412004076) का है। यह दुकान वन विभाग के नियंत्रण में आती है। नियम कहता है कि हर महीने राशन वितरण के बाद दुकान संचालक को उसके हिस्से का कमीशन मिलना चाहिए, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। लेकिन सारंगढ वन मंडल के अधिकारियों की संवेदनहीनता देखिए कि साल 2023 से आज तक एक पैसा भी जारी नहीं किया गया है। विभाग लगभग 1 लाख 60 हजार 294 रुपये की भारी-भरकम राशि दबाकर बैठा है। आखिर यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है या किसके इशारे पर रोका गया है, यह बड़ा सवाल है।

अफसरों की चैखट पर घिस गई चप्पलें, नहीं पसीजा दिल

दुकान संचालक (DFO Office Commission Issue) सुरेंद्र पांडे की हालत आज किसी बंधुआ मजदूर से कम नहीं है। उन्होंने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे इस गरीब आदिवासी क्षेत्र में अपनी जेब से पैसे लगाकर राशन बांट रहे हैं। हम्माली, परिवहन और दुकान का किराया तक देने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है। पांडे का कहना है कि वे डीएफओ कार्यालय के 20 से ज्यादा चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन वहां बैठे बाबू और साहब हर बार नया बहाना बनाकर उन्हें भगा देते हैं। ऐसा लगता है कि वन विभाग के अफसरों को गरीब की हाय और आदिवासियों के निवाले की कोई फिक्र नहीं है।

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बॉर्डर पर मचेगा हाहाकार, कौन होगा जिम्मेदार?

कमीशन की राशि(DFO Office Commission Issue) न मिलने से अब दुकान संचालक के हाथ खड़े हो गए हैं। उनके पास अब सोसायटी से अगला राशन उठाने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं बची है। अगर इस महीने राशन नहीं उठा, तो खम्हरिया क्षेत्र के लगभग 250 राशन कार्डधारी आदिवासी परिवार दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे। ग्रामीणों में भी विभाग के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी उनकी दुकान का पैसा डकार कर बैठे हैं। अगर राशन वितरण बंद हुआ, तो ग्रामीण सीधे सड़कों पर उतरकर वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।

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DFO Office Commission Issue भ्रष्टाचार की बू या प्रशासनिक नकारापन

तीन साल का वक्त कोई कम नहीं होता। इतने लंबे समय तक भुगतान (DFO Office Commission Issue) रोकना केवल लापरवाही नहीं बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक प्रताड़ना है। सवाल यह उठता है कि क्या डीएफओ कार्यालय किसी ‘खास सेवा’ के इंतजार में यह फाइल दबाकर बैठा है? क्या गरीब सेल्समैन से भी कमीशन में हिस्सा मांगा जा रहा है? जिस तरह से अधिकारी इस मामले को टाल रहे हैं, उससे भ्रष्टाचार की गहरी बू आ रही है। अगर जल्द ही भुगतान नहीं हुआ, तो यह मामला केवल कमीशन का नहीं रहेगा, बल्कि आदिवासियों के हक पर डाका डालने वाले अफसरों की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है।

 

 

 

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