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Anti-Drug Campaign : छत्तीसगढ़ में ड्रग माफिया पर अब एसओजी-एएनटीएफ संभालेगी मोर्चा

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ में नशे के बढ़ते नेटवर्क (Anti-Drug Campaign) को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। प्रदेश की शांत आबोहवा को दूषित करने वाले ड्रग तस्करों के खिलाफ सरकार ने सख्त अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के गठन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जो नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए विशेष रूप से काम करेगी।

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10 जिलों में तैनात होगी विशेष टास्क फोर्स

छत्तीसगढ़  सरकार की योजना के अनुसार एसओजी और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को प्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों में तैनात किया जाएगा। यह विशेष टीम आधुनिक तकनीक, साइबर निगरानी और मजबूत खुफिया नेटवर्क की मदद से ड्रग तस्करों के खिलाफ अभियान (Anti-Drug Campaign) चलाएगी। अधिकारियों के अनुसार इन टीमों का मुख्य उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करना और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ना है।

प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से नशे के कारोबार को लेकर चिंता बढ़ रही थी। खासतौर पर युवाओं को इस जाल में फंसाने की घटनाएं सामने आ रही थीं। ऐसे में सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। इस अभियान (Anti-Drug Campaign) के तहत पुलिस, खुफिया एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा।

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Anti-Drug Campaign 13 महीनों में बड़ी कार्रवाई

पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 13 महीनों में नशे के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुल 1,434 मामले दर्ज किए गए और 2,599 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। यह कार्रवाई भी सरकार के चल रहे नशा विरोधी अभियान (Anti-Drug Campaign) का ही हिस्सा मानी जा रही है।

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कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 20 हजार किलोग्राम से अधिक गांजा और लाखों की संख्या में नशीली गोलियां भी जब्त की हैं। इसके अलावा वर्ष 2025 में अपराधियों की करीब 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर उनके आर्थिक तंत्र को भी कमजोर किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक प्रहार से ड्रग तस्करी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा।

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युवाओं को नशे से बचाने पर जोर Anti-Drug Campaign

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साफ कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नशे के खिलाफ सख्त अभियान (Anti-Drug Campaign) चलाते हुए ड्रग तस्करों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

सरकार ने इस दिशा में केवल पुलिस कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि जागरूकता को भी महत्वपूर्ण हथियार बनाया है। इसके लिए हेल्पलाइन ‘मानस’ (1933) को सक्रिय किया गया है, जहां लोग नशे से जुड़ी जानकारी या शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

त्रिस्तरीय रणनीति पर काम

सरकार की रणनीति तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—सख्त कानून, आर्थिक कार्रवाई और जन-जागरूकता। इन तीनों स्तरों पर एक साथ काम कर प्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान (Anti-Drug Campaign) प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो आने वाले समय में नशे के कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला है। इसलिए पुलिस, प्रशासन और समाज के सहयोग से इस अभियान को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

 

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