Sarangarh Limestone Mining : 200 हेक्टेयर में 36 लाख टन चूना-पत्थर उत्खनन की तैयारी, सरिता मल्होत्रा ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
Sarangarh Limestone Mining सारंगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित चूना-पत्थर खनन परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। करीब 200.902 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित एक परियोजना में हर साल 36 लाख टन चूना-पत्थर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इतने बड़े पैमाने पर खनन से आसपास की कृषि भूमि, जल स्रोत, पर्यावरण और आबादी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खनन के साथ क्रशिंग, ब्लास्टिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से धूल, वायु व ध्वनि प्रदूषण बढ़ने तथा भूजल स्तर प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
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प्रस्तावित चूना-पत्थर खनन (Sarangarh Limestone Mining) का दायरा सारंगढ़ नगरपालिका के कुछ वार्डों सहित आसपास के कई गांवों तक बताया गया है। क्षेत्र में बड़ी आबादी की आजीविका खेती और जल स्रोतों पर निर्भर है। ऐसे में परियोजना के आकार को देखते हुए स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, खेती, पानी और पर्यावरण पर इसके संभावित असर का विस्तृत अध्ययन कराने की मांग उठ रही है।
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इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश सचिव सरिता मल्होत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर प्रस्तावित खनन परियोजना की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य, जल स्रोतों, कृषि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
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Sarangarh Limestone Mining 36 लाख टन सालाना उत्पादन का प्रस्ताव
पत्र में उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि एक प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्रफल करीब 200.902 हेक्टेयर है। इसमें हर साल लगभग 36 लाख टन चूना-पत्थर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के इतने बड़े स्तर को देखते हुए इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
मल्होत्रा ने कहा है कि विकास और खनिज संसाधनों के उपयोग का विरोध नहीं है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, पानी और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़े। प्रस्तावित लाइमस्टोन खनन परियोजना (Sarangarh Limestone Mining) के प्रभावों का वैज्ञानिक तरीके से आकलन कराने की जरूरत बताई गई है।
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धूल और ब्लास्टिंग से प्रदूषण की आशंका
पत्र में कहा गया है कि खनन, क्रशिंग और ब्लास्टिंग के दौरान धूल उड़ने के साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन सकती है। खनन क्षेत्र से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर सड़कों और आसपास के इलाकों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
इसके अलावा भूजल स्तर में गिरावट और कृषि भूमि को संभावित नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया है। मल्होत्रा ने मांग की है कि चूना-पत्थर की प्रस्तावित खदान (Sarangarh Limestone Mining) के प्रभावों का आकलन किसी प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सा या वैज्ञानिक संस्थान से स्वतंत्र रूप से कराया जाए।
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स्वास्थ्य और पर्यावरण की जांच पर जोर
पत्र में स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही हवा, पानी, मिट्टी, कृषि भूमि और आसपास के पर्यावरण पर परियोजना के संभावित असर का विस्तृत अध्ययन कराने का आग्रह किया गया है।
मल्होत्रा ने कहा है कि केवल सामान्य रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रस्तावित खनन (Sarangarh Limestone Mining) से प्रभावित होने वाले लोगों की चिंताओं को भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
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Sarangarh Limestone Mining रिपोर्ट और आपत्तियां सार्वजनिक करने की मांग
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय अध्ययन, रिपोर्ट और लोगों की आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। प्रभावित ग्रामीणों और नागरिकों की पारदर्शी जनसुनवाई कराने का भी आग्रह किया गया है, ताकि परियोजना से जुड़े सभी पक्षों की बात सामने आ सके।
Sarangarh Limestone Mining खनन आगे नहीं बढ़ाने की मांग
मल्होत्रा ने मांग की है कि जब तक सभी कानूनी, सामाजिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक खनन गतिविधियों को आगे न बढ़ाया जाए। यदि जांच में जनस्वास्थ्य, जल स्रोतों या कृषि भूमि पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की पुष्टि होती है तो परियोजना के स्थान या स्वरूप पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने कहा है कि सारंगढ़ की खनन परियोजना (Sarangarh Limestone Mining) पर फैसला लेते समय स्थानीय लोगों के हितों और पर्यावरणीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि सारंगढ़ का विकास जरूरी है, लेकिन विकास के साथ जल, जमीन, जंगल और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
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