कृषि समाचार

Narayanpur Horticulture Farming : योजना का लाभ लेकर किसान ने बदली खेती, सब्जियों से सालाना 3 लाख रुपये तक कमाई ड्रिप

ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीज से बढ़ी पैदावार, पारंपरिक खेती छोड़कर व्यावसायिक सब्जी उत्पादन की ओर बढ़े किसान

Narayanpur Horticulture Farming अगर आप भी पारंपरिक खेती से कम मुनाफे के कारण परेशान हैं तो उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं। सरकारी योजना के तहत अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन लेकर किसान सब्जियों की खेती से सालाना 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक से खेती में बदलाव (Narayanpur Horticulture Farming) का एक उदाहरण सामने आया है, जहां किसान ने ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीज का इस्तेमाल कर अपनी आय बढ़ाई है।

 

योजना का लाभ लेकर शुरू की व्यावसायिक खेती

वर्ष 2025-26 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत किसानों को उद्यानिकी फसलों के लिए सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। इसी योजना का लाभ लेकर किसान ने लौकी और मिर्च की खेती शुरू की। ड्रिप सिंचाई के जरिए पानी और उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल किया गया। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में बढ़ोतरी हुई।

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योजना के जरिए मिली सहायता (Narayanpur Horticulture Farming) ने किसान को पारंपरिक खेती से व्यावसायिक सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ने का अवसर दिया। वर्तमान में खेत में करेला, बरबटी, लौकी और मिर्च की फसल ली जा रही है।

 

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नारायणपुर के कालेंद्र ने बदली खेती की राह

यह सफलता नारायणपुर विकासखंड के ग्राम केरलापाल निवासी किसान कालेंद्र कुमेटी की है। पिता स्व. दुकुरू कुमेटी के पुत्र कालेंद्र पहले पूरी तरह पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। मेहनत और लागत के मुकाबले आमदनी सीमित थी। इसके बाद उन्होंने जिला उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और आधुनिक सब्जी उत्पादन की तकनीकों की जानकारी ली।

विभागीय मार्गदर्शन के बाद कालेंद्र ने अपने खेत में उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की। ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज और बेहतर फसल प्रबंधन से उनकी खेती का तरीका बदला। आज वह सालाना 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। कालेंद्र की यह उपलब्धि (Narayanpur Horticulture Farming) को किसानों के लिए आय बढ़ाने वाले विकल्प के रूप में सामने लाती है।

 

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चार सब्जियों की खेती, बढ़ी आमदनी

कालेंद्र के खेत में फिलहाल करेला, बरबटी, लौकी और मिर्च की फसलें लहलहा रही हैं। ड्रिप तकनीक से फसल की जरूरत के अनुसार पानी और उर्वरक दिया जा रहा है। इससे फसल की गुणवत्ता के साथ उत्पादन में भी सुधार हुआ है।

कालेंद्र का अनुभव बताता है कि पारंपरिक खेती के साथ तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप फसलों का चयन किया जाए तो खेती से बेहतर आय हासिल की जा सकती है। उद्यानिकी खेती (Narayanpur Horticulture Farming) के जरिए उन्हें नियमित रूप से व्यावसायिक उत्पादन का अवसर मिला है।

 

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आसपास के 10-15 किसानों ने भी अपनाया तरीका

कालेंद्र की खेती से प्रभावित होकर आसपास के गांवों के करीब 10 से 15 अन्य किसान भी अब पारंपरिक खेती से हटकर व्यावसायिक सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। किसान उनके खेत में अपनाई गई तकनीक और फसल उत्पादन को देखकर उद्यानिकी फसलों के प्रति रुचि ले रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और किसानों की मेहनत से खेती को आय का बेहतर माध्यम बनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। कालेंद्र की सफलता (Narayanpur Horticulture Farming) के जरिए यह दिखाती है कि सरकारी सहायता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़ सकते हैं।

 

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Narayanpur Horticulture Farming ड्रिप सिंचाई से खेती में आया बदलाव

कालेंद्र ने खेती में ड्रिप सिंचाई प्रणाली का इस्तेमाल किया है। इससे फसल की जरूरत के अनुसार पानी और उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलती है। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्नत बीज और सब्जी उत्पादन की आधुनिक तकनीक अपनाने से खेत की उत्पादकता में भी सुधार हुआ। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत मिली सहायता ने कालेंद्र को नई खेती अपनाने में सहयोग दिया। अब उनकी खेती से होने वाली 2 से 3 लाख रुपये सालाना आमदनी आसपास के किसानों को भी व्यावसायिक उद्यानिकी अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

 

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