Kaushali Saree Training : कंडोला में शुरू हुआ कौशली साड़ी बुनकरी प्रशिक्षण, महिलाओं को मिलेगा हुनर और रोजगार का मंच
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की पारंपरिक बुनकरी कला (Kaushali Saree Training) को नई पहचान दिलाने और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की गई है। बरमकेला विकासखंड के ग्राम पंचायत कंडोला स्थित महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क में सोमवार से कौशली साड़ी बुनकरी प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रशिक्षण 31 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसका आयोजन ज्योति संकुल संगठन ग्राम बोंदा द्वारा किया जा रहा है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य क्षेत्र की महिलाओं और पारंपरिक बुनकरों को कौशली साड़ी बुनाई की आधुनिक तकनीक सिखाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रसिद्ध संबलपुरी और इकत शैली की बुनाई को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
रुचि के अनुसार महिलाओं को सिखाई जाएगी बुनकरी
प्रशिक्षण में महिलाओं को बुनकरी के अलग-अलग कार्यों से परिचित कराया जाएगा। स्थानीय बुनकर मेहर ने बताया कि प्रशिक्षण में महिलाओं की रुचि के अनुसार उन्हें काम सिखाया जाएगा। किसी की रुचि धागा तैयार करने में है तो उसे उसी काम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं साड़ी बुनने और डिजाइन तैयार करने में रुचि रखने वाली महिलाओं को संबंधित तकनीक सिखाई जाएगी।
इस तरह प्रशिक्षण (Kaushali Saree Training) में महिलाओं को बुनकरी के अलग-अलग चरणों में दक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद अपने स्तर पर काम कर आय का नया स्रोत तैयार कर सकें।
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सपेरा बस्ती की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर
प्रशिक्षण का विशेष फोकस भिखमपुरा सपेरा बस्ती और आसपास के क्षेत्र की महिलाओं पर है। इन परिवारों के सामने रोजगार और आय के सीमित साधन होने के कारण महिलाओं को पारंपरिक और आधुनिक हस्तकरघा कार्य से जोड़ने की पहल की गई है।
कौशली साड़ी बुनकरी प्रशिक्षण (Kaushali Saree Training) के माध्यम से महिलाओं को ऐसा हुनर देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे घर या स्थानीय स्तर पर काम कर सकें और परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे सकें।
Kaushali Saree Training आय बढ़ाने में मददगार होगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम में सारंगढ़-बिलाईगढ़ कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने कहा कि सारबिला के अंतर्गत संबलपुरी कौशली साड़ी का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं इस विधा से जुड़ना चाहती हैं, उनके लिए यह प्रशिक्षण आय का नया स्रोत विकसित करने में लाभकारी होगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की ऐसी महिलाओं को, जिनके पास जीवनयापन के सीमित साधन हैं, विभिन्न हाथकरघा कार्यों से जोड़ा जाएगा। इससे उनके कौशल के साथ-साथ आय में भी वृद्धि हो सकेगी।
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पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने की तैयारी
प्रशिक्षण के जरिए पारंपरिक कौशली बुनाई को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने की योजना है। संबलपुरी और इकत शैली की बुनाई को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देकर तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
कौशली साड़ी प्रशिक्षण (Kaushali Saree Training) से महिलाओं को केवल बुनकरी का कौशल ही नहीं मिलेगा, बल्कि पारंपरिक कला को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का अवसर भी मिलेगा।
जनप्रतिनिधियों और बिहान समूह की दीदियों की मौजूदगी
प्रशिक्षण शुभारंभ कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय नायक, जनपद अध्यक्ष डॉ. विद्या चौहान, जिला पंचायत सदस्य सहोदरा सिदार, जनप्रतिनिधि ज्योति पटेल, स्वप्निल स्वर्णकार, प्रदीप सतपथी, स्थानीय सरपंच एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ ऋषिकेश तिवारी, जनपद सीईओ शिक्षा शर्मा, संजू पटेल, कुसुम भगत सहित बिहान समूह की दीदियों की भी विशेष उपस्थिति रही।











