Kanker Bridge Wooden News प्रदेश सरकार भले ही बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक विकास पहुंचने के दावे कर रही हो, लेकिन कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के बांसकुंड और नीचे तोनका गांव की तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। यहां दो गांवों के बीच आज भी पक्का पुल नहीं बन पाया है। मजबूरी में ग्रामीणों ने बांस और लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार किया है, जिस पर हर दिन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। बरसात में यह पुल किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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हाट-बाजार से अस्पताल तक, हर सफर बना जोखिम
दोनों गांवों के ग्रामीणों के लिए यही लकड़ी का पुल (Kanker Bridge Wooden News) जीवनरेखा बन गया है। हाट-बाजार जाना हो, अस्पताल पहुंचना हो या किसी जरूरी काम से बाहर निकलना हो, हर बार इसी खतरनाक पुल को पार करना उनकी मजबूरी है। बरसात में उफनते नाले के बीच यह सफर किसी मौत के खेल से कम नहीं होता।
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प्रशासन ने नहीं सुनी, ग्रामीणों ने खुद बना लिया पुल
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से पुल-पुलिया (Kanker Bridge Wooden News) निर्माण की मांग जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से की जा रही है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। आखिरकार मजबूरी में ग्रामीणों ने अधूरे चेकडैम के खंभों पर बांस और लकड़ी का पुल तैयार कर लिया। यही अस्थायी पुल अब दो गांवों के बीच आवागमन का एकमात्र सहारा बना हुआ है।
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स्कूल पहुंचने के लिए रोज जान हथेली पर रखते हैं बच्चे
सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूली बच्चों की है। रोजाना मासूम बच्चे इसी जर्जर लकड़ी के पुल (Kanker Bridge Wooden News) से होकर विद्यालय पहुंचते हैं। जरा-सी चूक या पुल के कमजोर हिस्से के टूटने पर बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा की बात तो होती है, लेकिन बच्चों को सुरक्षित रास्ता देने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
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अधूरा चेकडैम बना ग्रामीणों की मजबूरी का सहारा
किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए जल संसाधन विभाग ने यहां चेकडैम का निर्माण शुरू किया था, लेकिन परियोजना अधूरी छोड़ दी गई। आज उसके लोहे के गेट जंग खा रहे हैं, जबकि उसी अधूरे ढांचे का सहारा लेकर ग्रामीणों ने लकड़ी और बांस का पुल बनाया है। इससे निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार और लापरवाही भी उजागर हो रही है।
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Kanker Bridge Wooden News हरकत में आया प्रशासन
ग्रामीणों की परेशानी सामने आने के बाद कलेक्टर (Kanker Bridge Wooden News) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को पुल-पुलिया निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान भी मिलेगा।











