छत्तीसगढ़

Bakanae Disease In Rice : पौधे जरूरत से ज्यादा लंबे हो रहे हैं तो हो जाएं सावधान, धान में हो सकता है इस खतरनाक रोग का संक्रमण

Bakanae Disease In Rice : धान की खेती भारत के किसानों के जीवन और आय का महत्वपूर्ण आधार है। मॉनसून के आते ही देशभर में धान (Bakanae Disease in Rice) की रोपाई बड़े पैमाने पर शुरू हो जाती है। इस साल अच्छी बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं क्योंकि धान की फसल तेजी से बढ़ रही है। लेकिन फसल की बढ़वार के साथ ही कीटों और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर धान में लगने वाला एक खतरनाक रोग है झंडा रोग, जिसे बकानी रोग कहा जाता है। यह फसल की ग्रोथ को रोक देता है और उत्पादन पर गहरा असर डालता है, जिससे किसान भारी संकट में आ जाते हैं।

बकानी रोग के लक्षण

धान की फसल में बकानी रोग की पहचान कई तरीकों से की जा सकती है। इस रोग से प्रभावित पौधे बाकी पौधों की तुलना में असामान्य रूप से लंबे और पतले हो जाते हैं। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और बाद में मुरझाकर झड़ जाती हैं। जिन पौधों पर (Bakanae Disease in Rice) का संक्रमण होता है, उनकी जड़ें भूरी या काली हो जाती हैं और उनका विकास रुक जाता है। कई पौधे तो अंकुरण के समय ही मर जाते हैं, जिससे खेत में खाली स्थान बन जाते हैं और उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है।

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रोग फैलने के मुख्य कारण

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विशेषज्ञों के अनुसार, बकानी रोग एक फफूंद जनित रोग है और इसके फैलने के कई कारण हैं, जैसे –

बुवाई से पहले बीजों का सही उपचार न करना।

नर्सरी में गंदे पानी का प्रयोग।

खेत में जरूरत से ज्यादा नमी होना, जिससे फफूंद तेजी से पनपती है।

एक ही खेत में बार-बार धान की फसल उगाना।

इन कारणों से यह (Bakanae Disease in Rice) तेजी से फैलकर पूरे खेत को प्रभावित कर सकता है।

किसान इस तरह करें बचाव

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को धान की फसल को बकानी रोग से बचाने के लिए समय रहते कवकनाशी दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए प्रति एकड़ की दर से लगभग 500 ग्राम टेबुकोनाजोल और सल्फर को बालू या मिट्टी में मिलाकर खेत में फैलाना चाहिए। दवा का इस्तेमाल केवल तब करें जब खेत में पानी भरा हो, ताकि दवा का असर सही तरीके से फसल तक पहुँच सके। समय पर रोकथाम करने से किसान इस बीमारी से बच सकते हैं और पैदावार को सुरक्षित रख सकते हैं।

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