कृषि समाचार

Grafted Vegetable Farming : कम लागत, ज्यादा पैदावार… ग्राफ्टेड टमाटर-बैंगन की खेती से बदलेगी किसानों की तस्वीर

ग्राफ्टेड सब्जी की खेती (Grafted Vegetable Farming) अब बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के बीच किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। वैज्ञानिक तकनीक से तैयार ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन के पौधे कम लागत में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और रोगों से सुरक्षा देने में कारगर साबित हो रहे हैं। इसी दिशा में किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

एक लाख से ज्यादा ग्राफ्टेड पौधों का वितरण

ग्राफ्टेड सब्जी की खेती (Grafted Vegetable Farming) को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 1 लाख 1 हजार 800 ग्राफ्टेड पौधे वितरित किए गए। इनमें 51 हजार 800 ग्राफ्टेड टमाटर और 50 हजार ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ग्राफ्टेड पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, जिससे इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक रहती है और प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन मिलता है।

धमतरी में किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

ग्राफ्टेड सब्जी की खेती (Grafted Vegetable Farming) पर यह एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम केरेमुड़ा में आयोजित किया गया। जिला पंचायत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन प्रदान (PRADAN) संस्था ने किया। प्रशिक्षण में नगरी और मगरलोड विकासखंड की कृषि सखियों, मास्टर ट्रेनर्स और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान बनेगी ग्राफ्टेड सब्जी: धमतरी में वैज्ञानिक प्रशिक्षण संपन्न

लाइव डेमो से सिखाई आधुनिक खेती

प्रशिक्षण के दौरान ग्राफ्टेड सब्जी की खेती (Grafted Vegetable Farming) का खेत पर लाइव प्रदर्शन किया गया। किसानों को भूमि की तैयारी, पौधरोपण, मल्चिंग, नमी संरक्षण, जैविक खेती, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), मृदा स्वास्थ्य और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं का मौके पर वैज्ञानिक समाधान भी बताया।

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FPO और PRADAN की साझेदारी बनी ताकत

ग्राफ्टेड सब्जी की खेती (Grafted Vegetable Farming) को बढ़ावा देने में गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) और प्रदान (PRADAN) संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किसानों को उन्नत पौधे, जैविक खाद और पूरे फसल चक्र के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला पंचायत की यह पहल आधुनिक, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल खेती का नया मॉडल बन रही है।

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