कृषि समाचार

Grafted Brinjal Farming : ग्राफ्टेड बैंगन खेती से बदली किस्मत, कम लागत में लाखों की आय का रास्ता खुला

Raigarh News : आधुनिक कृषि तकनीक और शासकीय योजनाओं के समुचित उपयोग से खेती (Grafted Brinjal Farming) अब केवल आजीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का माध्यम बनती जा रही है। रायगढ़ जिले के विकासखंड खरसिया अंतर्गत ग्राम करूमौहा के किसान मुरलीधर साहू ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर यही सिद्ध कर दिखाया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उनकी खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और वे आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

पूर्व में परंपरागत धान की खेती (Grafted Brinjal Farming) करने वाले मुरलीधर साहू को अधिक लागत और सीमित लाभ के कारण संतोष नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर आधुनिक खेती के विकल्पों पर जानकारी प्राप्त की। विभागीय मार्गदर्शन ने उनके कृषि जीवन को नई दिशा दी और उन्होंने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया।

(Grafted Brinjal Farming) ग्राफ्टेड तकनीक से क्रांतिकारी बदलाव

ग्राफ्टेड बैंगन ऐसी उन्नत तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों (Grafted Brinjal Farming)  के हिस्सों को जोड़कर एक मजबूत पौधा तैयार किया जाता है। इसमें एक ओर मजबूत जड़ वाला रूटस्टॉक होता है, जबकि दूसरी ओर उच्च गुणवत्ता फल देने वाला स्कायन लगाया जाता है। इस तकनीक से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मिट्टी जनित रोगों का प्रभाव कम होता है और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

उद्यानिकी विभाग की अनुशंसा पर मुरलीधर साहू ने अपनी एक हेक्टेयर भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन का रोपण किया। जैविक खाद और जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से खेती की लागत भी कम रही और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।

80 क्विंटल से बढ़कर 170 क्विंटल तक पहुंची उपज

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना (Grafted Brinjal Farming) के अंतर्गत उन्हें 20 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का परिणाम यह रहा कि जहां पहले पारंपरिक खेती में उन्हें मात्र 80 से 85 क्विंटल उत्पादन मिल पाता था, वहीं ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उपज बढ़कर 150 से 170 क्विंटल तक पहुँच गई।

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बेहतर बाजार मूल्य मिलने से मुरलीधर साहू को लगभग 4.5 लाख रुपये की कुल आय हुई, जिसमें से करीब 3 लाख रुपये शुद्ध लाभ के रूप में प्राप्त हुए। यह लाभ पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।

कम लागत, जैविक पद्धति और अधिक मुनाफा

मुरलीधर साहू की इस सफलता को देखकर आसपास के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के किसान (Grafted Brinjal Farming)  भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जैविक पद्धति, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के समन्वय से कम लागत में अधिक उत्पादन का संदेश तेजी से फैल रहा है।

उनकी यह सफलता कहानी बताती है कि यदि किसान सही मार्गदर्शन, नवीन तकनीक और राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाओं का लाभ लें, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। खरसिया क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल है, बल्कि आधुनिक और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

 

 

 

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