Chhattisgarh Assembly Seats Expansion : छत्तीसगढ़ में बढ़ेंगी विधानसभा की 20 सीटें, लोकसभा क्षेत्र भी बढ़ेंगे

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Chhattisgarh Assembly Seats Expansion

Delimitation Commission :  छत्तीसगढ़ की राजनीति  (Chhattisgarh Assembly Seats Expansion) आने वाले कुछ वर्षों में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक दौर से गुजरने वाली है। आगामी राष्ट्रीय जनगणना और उसके तत्काल बाद होने वाले ‘परिसीमन’ (Delimitation) से प्रदेश का पूरा राजनीतिक मानचित्र बदल जाएगा।

वर्तमान में 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा का विस्तार होकर 120 सीटों तक पहुंचने की प्रबल संभावना है। यह बदलाव केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की वर्तमान 11 लोकसभा सीटों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन किया जाएगा।

डिजिटल माडल पर आधारित होगी 2027 की जनगणना

प्रशासन ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी हैं। यह जनगणना भारत के इतिहास में पहली बार पूरी तरह से ‘डिजिटल माडल’ पर आधारित होगी। डेटा जुटाने की पारंपरिक कागजी प्रक्रिया को खत्म कर मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, नागरिकों को एक विशेष पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प भी दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) के लिए सटीक और अद्यतन जनसंख्या डेटा सुनिश्चित करेगी।

जनगणना की महाप्रक्रिया (Chhattisgarh Assembly Seats Expansion)

जनगणना की पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए इसे दो मुख्य चरणों में बांटा गया है:

मकान सूचीकरण (मई से शुरू ) : पहले चरण में प्रदेश भर के सभी भवनों की गिनती की जाएगी। इसमें भवनों के उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक या कार्यालय) और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं (पानी, बिजली, शौचालय) की विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। प्रत्येक 180 से 200 भवनों पर एक प्रगणक (Enumerator) की नियुक्ति की जाएगी। रायपुर सहित कई प्रमुख नगरीय निकायों ने इसके लिए मकानों की नंबरिंग का कार्य पहले ही शुरू कर दिया है।

जनसंख्या गणना  : दूसरे चरण में सामान्य, संस्थागत (अस्पताल, हॉस्टल) और बेघर परिवारों के सभी सदस्यों की विस्तृत व्यक्तिगत और सामाजिक-आर्थिक गणना की जाएगी। यही डेटा परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) के लिए आधार बनेगा।

90 से 120 : विधानसभा सीटों का नया गणित

वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर राज्य गठन के बाद से, छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या 90 बनी हुई है (पहला चुनाव 2003 में हुआ)। हालांकि, संविधान के संशोधित अनुच्छेद 82 के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर देश भर में नया परिसीमन किया जाना अनिवार्य है। राजनीतिक विशेषज्ञों और सांख्यिकीय जानकारों का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में प्रदेश में करीब 30 नई विधानसभा सीटें जुड़ सकती हैं।

इसके साथ ही, महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के लागू होने के बाद, प्रदेश की कुल सीटों में से करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। परिसीमन की इस जटिल और महत्वपूर्ण प्रक्रिया को निष्पादित करने के लिए केंद्र सरकार 2025 में एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन कर सकती है, जिसकी अध्यक्षता सामान्यतः उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी अत्यंत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा की जाएगी।

बस्तर संभाग और क्षेत्रीय समीकरणों में भारी उलटफेर

आगामी परिसीमन का सबसे व्यापक और गहरा प्रभाव बस्तर संभाग में देखने को मिल सकता है। वर्तमान में इस संभाग में 12 विधानसभा और दो लोकसभा (बस्तर व कांकेर) सीटें हैं। भौगोलिक रूप से, बालोद जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में कांकेर लोकसभा का हिस्सा हैं।

परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) के नए खाके में बालोद जिला कांकेर लोकसभा से अलग होकर किसी अन्य नवगठित लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बन सकता है। बस्तर संभाग के भीतर जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए चार से छह नई विधानसभा सीटें बढ़ने की प्रबल संभावना है। इससे क्षेत्र में लंबे समय से स्थापित राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

1951 से अब तक छह परिसीमन

छत्तीसगढ़ का राजनीतिक सफर मध्य प्रांत और बरार (1950 तक) से शुरू होकर एक स्वतंत्र राज्य बनने तक का रहा है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद, 1951 के पहले आम चुनाव में यहां 61 विधानसभा सीटें थीं। समय के साथ परिसीमन ने कई पुरानी सीटों को समाप्त किया और कई नई सीटों को जन्म दिया। राज्य गठन से पहले और बाद में अब तक कुल छह बार परिसीमन किया जा चुका है। 2027 की जनगणना के बाद होने वाला यह सातवां परिसीमन होगा, जिसे परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा अंजाम दिया जाएगा।

अस्तित्व खोने वाली और अस्तित्व में आई प्रमुख सीटें

विगत परिसीमनों के दौरान सूरजपुर, पाल, पिलखा, बगीचा, तपकरा, सरिया, जरहागांव, सिपत, पामगढ़ (पुराना स्वरूप), मालखरोदा, रायपुर शहर (पुराना स्वरूप), मंदिर हसौद, पल्लारी, भटगांव (पुराना स्वरूप), भानपुरी, केसलूर, मारो, धमधा, खेरथा, चौकी और विरेन्द्र नगर जैसी कई प्रमुख विधानसभा सीटें अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। वहीं, नए परिसीमन ने भरतपुर-सोनहट, भटगांव (नया), प्रतापपुर, रामानुजगंज, कुनकुरी, कोरबा, बेलतरा, जैजैपुर, पामगढ़ (नया), बिलाईगढ़, रायपुर पश्चिम, रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, दुर्ग ग्रामीण, वैशाली नगर, अहिवारा, नवागढ़, पंडरिया, मोहला-मानपुर, अंतागढ़ और बस्तर जैसी नई सीटों को जन्म दिया है। आगामी परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) के निर्णय से यह सूची और लंबी हो सकती है।

जातिगत समीकरणों और आरक्षण पर गहरा प्रभाव

1951 में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान छत्तीसगढ़ की 61 सीटों में से केवल आठ अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित थीं। 1957 से अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षण की व्यवस्था शुरू हुई। वर्तमान में विधानसभा में 29 सीटें एसटी और 10 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा जनसंख्या के नवीनतम डिजिटल डेटा के आधार पर इन आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके विपरीत, कई वर्तमान आरक्षित सीटें जनसंख्या अनुपात में बदलाव के कारण अनारक्षित श्रेणी में भी शामिल हो सकती हैं, जिससे राजनीतिक दलों के लिए जातिगत समीकरण बैठाना एक बड़ी चुनौती होगी।

क्या है परिसीमन और सत्ता की नई चाबी

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, परिसीमन का शाब्दिक अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय (लोकसभा या विधानसभा) वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करना। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक नागरिक के वोट का मूल्य लगभग समान रहे। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, 2027 की जनगणना और उसके बाद का परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) केवल एक प्रशासनिक अभ्यास नहीं होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सत्ता की चाबी का एक नया और जटिल खाका तैयार करेगा। प्रदेश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी से इन संभावित और बड़े बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी भविष्य की रणनीतियों और सांगठनिक ढांचे पर काम शुरू कर दिया है।

 

 


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