Grafted Brinjal Farming : छत्तीसगढ़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती फायदे का सौदा,  1 एकड़ में  1.33 लाख का मुनाफा

Grafted Brinjal Farming Profit : छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने सफलता की नई इबारत लिखी है। शासन की योजनाओं और ड्रिप इरिगेशन के समन्वय से किसान बसदेव राजपूत ने सीमित भूमि में बंपर उत्पादन कर लाखों का शुद्ध लाभ कमाया है, जो अब प्रदेश के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।

By admin
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Grafted Brinjal Farming
Highlights
  • आधुनिक तकनीक का संगम : किसान ने परंपरागत खेती छोड़ ड्रिप इरिगेशन और प्लास्टिक मल्चिंग के जरिए उत्पादन को दोगुना किया।
  • सरकारी सहायता का लाभ : राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ₹30,000 का अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर लागत को कम किया।
  • बंपर मुनाफा : महज 1 एकड़ क्षेत्र में 62,000 की लागत लगाकर ₹1.33 लाख का शुद्ध लाभ अर्जित किया।

Agriculture Subsidy Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों (Grafted Brinjal Farming) पर ले जाने और किसानों की आय दोगुनी करने के शासन के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे सफल किसानों की कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में तब्दील कर दिया है। इसी क्रम में मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम खुटेरा के एक प्रगतिशील किसान बसदेव राजपूत ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के जरिए एक मिसाल कायम की है।

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करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि के स्वामी श्री राजपूत पहले पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उन्होंने बाजार की मांग और वैज्ञानिक सलाह को मानते हुए अपनी कुल जमीन में से लगभग 1 एकड़ क्षेत्र में उद्यानिकी फसल के रूप में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) करने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

परंपरागत खेती के मुकाबले आधुनिक तकनीक का प्रभाव

किसान बसदेव राजपूत ने अपनी इस सफलता का श्रेय उन्नत कृषि उपकरणों और तकनीकों को दिया है। उन्होंने परंपरागत सिंचाई विधियों के बजाय ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (Drip Irrigation System) और खरपतवार नियंत्रण के लिए प्लास्टिक मल्चिंग (Plastic Mulching) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। ड्रिप इरिगेशन के उपयोग से न केवल जल संरक्षण हुआ, बल्कि उर्वरकों का सीधा उपयोग पौधों की जड़ों तक संभव हो सका, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

प्लास्टिक मल्चिंग ने मिट्टी की नमी को बनाए रखने और हानिकारक कीटों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन तकनीकों के तालमेल से ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) में लगने वाली मेहनत और समय दोनों में काफी कमी आई।

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शासन की योजनाओं से मिला संबल

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाई जा रही कृषि कल्याणकारी योजनाओं (Agriculture Subsidy Chhattisgarh) ने बसदेव की राह और आसान कर दी। उन्हें शासन की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वर्ष 2025-26 के अंतर्गत न केवल तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया, बल्कि लगभग 30,000 का आर्थिक अनुदान भी प्राप्त हुआ। इस सहायता राशि ने उन्हें आधुनिक संसाधन जुटाने और गुणवत्तापूर्ण हाइब्रिड पौधे खरीदने में सक्षम बनाया। विशेषज्ञों के निरंतर संपर्क में रहने के कारण उन्हें कीट प्रबंधन और उर्वरक उपयोग के सही समय की सटीक जानकारी प्राप्त हुई।

Grafted Brinjal Farming उत्पादन और आय का गणित

इन वैज्ञानिक प्रयासों का परिणाम बेहद उत्साहजनक रहा। श्री राजपूत को प्रति एकड़ लगभग 130 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। स्थानीय और थोक मंडियों में फसल की मांग अधिक होने के कारण उन्हें 15 से 20 प्रति किलोग्राम का अच्छा थोक मूल्य प्राप्त हुआ। इस दर पर उनकी कुल फसल की बिक्री लगभग ₹1,95,000 में हुई।

अगर लागत की बात करें तो बीज, मल्चिंग, खाद और मजदूरी मिलाकर उनकी कुल लागत लगभग ₹62,000 रही। इस प्रकार उन्हें केवल एक सीजन में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) से करीब ₹1,33,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा पारंपरिक धान या अन्य फसलों की तुलना में कहीं अधिक है, जो यह दर्शाता है कि फसल विविधीकरण (Crop Diversification) ही किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार है।

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ग्राफ्टेड बैंगन की विशेषता और भविष्य की संभावनाएं

किसान श्री राजपूत का अनुभव है कि सामान्य बैंगन की तुलना में ग्राफ्टेड बैंगन (Grafted Brinjal) की प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है। इसमें मिट्टी से होने वाले रोगों (Soil-borne diseases) का खतरा कम होता है और उत्पादन की अवधि भी लंबी होती है। वर्तमान में उनकी फसल से उत्पादन निरंतर जारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी कुछ हफ्तों में 30 से 40 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त होगा, जिससे कुल शुद्ध लाभ ₹1.5 लाख के पार जाने की पूरी संभावना है।

गांव के लिए बने प्रेरणा स्रोत

बसदेव राजपूत की इस उपलब्धि ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि वे अब अपने क्षेत्र के रोल मॉडल बन गए हैं। उनकी सफलता को देखकर ग्राम खुटेरा और आसपास के गांवों के किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों और ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई किसान अब ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगवाने के लिए कृषि विभाग में आवेदन कर रहे हैं।

यह स्पष्ट है कि यदि किसान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं और मेहनत करें, तो छत्तीसगढ़ की धरती से सोना उगाया जा सकता है। बसदेव राजपूत की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि नवाचार ही कृषि को एक टिकाऊ और सम्मानजनक व्यवसाय बनाने की कुंजी है।

 


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