Town Planning Scam : नियमों की बलि चढ़ाकर कालोनाइजरों को फायदा पहुंचाने वाले 2 अफसर सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के आवास एवं पर्यावरण विभाग की इस बड़ी स्ट्राइक ने टाउन प्लानिंग विभाग में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को हिला कर रख दिया है। नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने वाले अधिकारियों पर निलंबन की यह गाज पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक सख्त संदेश है।

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Town Planning Scam

Town Planning Corruption : छत्तीसगढ़ के टाउन प्लानिंग विभाग (Town Planning Scam) में भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने टाउन प्लानिंग भ्रष्टाचार (Town Planning Corruption) के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो उच्च पदस्थ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन की इस कार्रवाई से उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जो रसूखदार कालोनाइजरों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे थे।

निलंबन की जद में आए बड़े अधिकारी

आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, राजनांदगांव के तत्कालीन संयुक्त संचालक सूर्यभान सिंह ठाकुर, जो वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ थे, और उप संचालक कमला सिंह को निलंबित (Town Planning Scam) किया गया है। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने ‘सत्यम परिवेश’ नामक कालोनी के अभिन्यास यानी ले-आउट (Layout Approval – Town Planning Corruption) के अनुमोदन में भारी वित्तीय अनियमितता की है। जांच में पाया गया कि इस एक प्रोजेक्ट के माध्यम से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि पहुँचाई गई और कालोनाइजर को अवैध रूप से लाभ दिया गया।

जांच समिति की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

विभागीय सूत्रों के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को इस विवादास्पद प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी। शुरुआती शिकायतों के बाद जब अवर सचिव शत्रुहन यादव ने फाइल की पड़ताल करवाई, तो परत-दर-परत गड़बड़ियां सामने आती गईं। पूर्व में इन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया था, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब पूरी तरह से संतोषजनक नहीं थे। इसके बाद गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की और दोनों अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को दरकिनार किया।

विवादों और शिकायतों का लंबा इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब इन अधिकारियों के नाम किसी विवाद में उछले हों। संयुक्त संचालक सूर्यभान सिंह ठाकुर (Town Planning Scam) का नाम लंबे समय से अवैध प्लाटिंग को संरक्षण देने और वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के लिए चर्चा में रहा है। वहीं, उप संचालक कमला सिंह की मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि उनके खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने की गंभीर शिकायत भी बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश Town Planning Scam

शासन की इस सख्त कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टाउन प्लानिंग विभाग में अब मनमानी नहीं चलेगी। विभागीय सचिवों का मानना है कि इस निलंबन के बाद विभाग के भीतर चल रहे अन्य संदिग्ध प्रोजेक्ट्स की फाइलें भी दोबारा खोली जा सकती हैं। आम जनता और जमीन खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी रसूख का क्यों न हो।

 

 


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