Farming of Sunflower Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के कृषि परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव (Surajmukhi Ki Kheti) देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग के निरंतर प्रयासों से अब किसान ‘मोनोकल्चर’ यानी केवल धान की खेती के चक्र से बाहर निकलकर नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। महासमुंद जिले के विकासखंड सरायपाली के ग्राम सिरशोभा से एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ प्रगतिशील किसान गौतम पटेल ने ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी की खेती (Summer Sunflower Cultivation) को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाया है।
विफलता से मिली नई राह Surajmukhi Ki Kheti
गौतम पटेल साझा करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों तक वे रबी और खरीफ दोनों सीजन में धान की खेती (Surajmukhi Ki Kheti) पर निर्भर थे। हालांकि, धान एक जल-गहन फसल है। पिछले वर्ष गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर गिरने और सिंचाई के साधनों की कमी के कारण उनकी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई। इस संकट के समय कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी की खेती (Summer Sunflower Cultivation) की सलाह दी, जो न केवल कम पानी में तैयार होती है, बल्कि बाजार में इसकी मांग भी बहुत अधिक है।
आधुनिक पद्धति और वैज्ञानिक प्रबंधन
कृषि विभाग के मार्गदर्शन में गौतम पटेल ने इस वर्ष अपने 1.5 एकड़ खेत में सूर्यमुखी (Surajmukhi Ki Kheti) बोई है। विभाग द्वारा उन्हें न केवल उन्नत बीज (Improved Seeds) उपलब्ध कराए गए, बल्कि बुवाई से लेकर खाद प्रबंधन तक का तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्होंने बताया कि सूर्यमुखी की खेती में धान की तुलना में लागत बहुत कम आती है। जहां धान में निरंतर सिंचाई और महंगे कीटनाशकों की जरूरत होती है, वहीं ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी की खेती (Summer Sunflower Cultivation) में सीमित सिंचाई और न्यूनतम रखरखाव से भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उत्पादन और आय का आकर्षक गणित
वर्तमान में गौतम पटेल के खेत में फसल पूरी तरह लहलहा (Surajmukhi Ki Kheti) रही है और कटाई के लिए तैयार होने वाली है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। इस प्रकार, उनके 1.5 एकड़ क्षेत्र से कुल 12 से 15 क्विंटल सूर्यमुखी प्राप्त होने की संभावना है।
बाजार भाव पर नजर डालें तो वर्तमान में सूर्यमुखी का मूल्य ₹4,500 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ है। इस आधार पर श्री पटेल को ₹54,000 से लेकर ₹82,500 तक की सकल आय प्राप्त हो सकती है। बीज, खाद और श्रम की लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग ₹40,000 से ₹65,000 का शुद्ध लाभ मिलने की उम्मीद है। यह मुनाफा धान की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और सुरक्षित है।
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तिलहन मिशन को मिल रही मजबूती Surajmukhi Ki Kheti
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा “तिलहन मिशन” के तहत किसानों को ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी की खेती (Summer Sunflower Cultivation) के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है, बल्कि खाद्य तेलों के मामले में राज्य को आत्मनिर्भर बनाना भी है। सरायपाली क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु सूर्यमुखी के लिए अत्यंत उपयुक्त पाई गई है, यही कारण है कि गौतम पटेल जैसे प्रगतिशील किसान अब दूसरों के लिए मार्गदर्शक बन रहे हैं।
पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
विशेषज्ञों का मानना है कि फसल चक्र में बदलाव (Crop Rotation) करने से मिट्टी की उर्वरकता बनी रहती है। लगातार धान उगाने से जमीन की सेहत गिरती है, जबकि ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी की खेती (Summer Sunflower Cultivation) जैसी तिलहन फसलें मिट्टी के पोषक तत्वों को संतुलित करने में मदद करती हैं। साथ ही, सूर्यमुखी के फूल मधुमक्खी पालन के लिए भी अनुकूल होते हैं, जिससे किसान अतिरिक्त आय के स्रोत भी विकसित कर सकते हैं।
गौतम पटेल की यह सफलता दर्शाती है कि यदि किसान नई सोच और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, तो खेती कभी घाटे का सौदा नहीं होगी। आज उनके गांव के अन्य किसान भी उनके खेत का मुआयना कर रहे हैं और आगामी सीजन में ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी की खेती (Summer Sunflower Cultivation) शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
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