Nand Kumar Sai Five Kids Statement : आखिर क्यों कद्दावर नेता ने आदिवासियों से की 5 बच्चे पैदा करने की अपील

Nand Kumar Sai : क्या छत्तीसगढ़ की राजनीति में अब 'जनसंख्या' बनेगा सबसे बड़ा हथियार? पूर्व नेता प्रतिपक्ष नंद कुमार साय के एक चौंकाने वाले बयान ने प्रदेश के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। समाज को बचाने की दलील या राजनीतिक दांव आखिर इस बयान के पीछे का असली सच क्या है?

By admin
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Nand Kumar Sai Five Kids Statement

Nand Kumar Sai : छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले और प्रदेश के प्रथम नेता प्रतिपक्ष नंद कुमार साय (Nand Kumar Sai Five Kids Statement) ने एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है। रायपुर में आयोजित सर्व आदिवासी समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने जो बयान दिया, उसने सबको हैरत में डाल दिया है। नंद कुमार साय का 5 बच्चों वाला बयान अब केवल एक अपील नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। साय ने मंच से खुलेआम आदिवासी परिवारों को जनसंख्या बढ़ाने की सलाह देते हुए कम से कम पांच बच्चे पैदा करने को कहा है।

अस्तित्व बचाने की मजबूरी या रणनीति Nand Kumar Sai Five Kids Statement

नंद कुमार साय, जो कई बार सांसद और विधायक रह चुके हैं, ने समाज की घटती आबादी पर गहरी चिंता व्यक्त की। नंद कुमार साय का 5 बच्चों वाला बयान (Nand Kumar Sai Five Kids Statement) उनकी उस सोच का हिस्सा है, जहाँ वे मानते हैं कि लोकतंत्र में ‘सिरों की गिनती’ ही असली ताकत है। उन्होंने बैठक में कहा कि “हम दो, हमारे दो” के नारे का सबसे ज्यादा पालन आदिवासियों ने किया और इसी वजह से आज उनकी आबादी का प्रतिशत गिरता जा रहा है।

साय का तर्क है कि यदि समाज की जनसंख्या इसी तरह कम होती रही, तो आने वाले वर्षों में आदिवासियों की सामाजिक, सांस्कृतिक और सबसे महत्वपूर्ण ‘राजनीतिक ताकत’ खत्म हो जाएगी। उन्होंने आगाह किया कि राजनीतिक सीटों का परिसीमन और आरक्षण भी जनसंख्या के आधार पर होता है, ऐसे में कम आबादी समाज को हाशिए पर धकेल देगी।

जनगणना को लेकर भी जताई बड़ी आशंका

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए साय ने आगामी जनगणना को लेकर भी समाज को सतर्क रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि नंद कुमार साय का 5 बच्चों वाला बयान (Nand Kumar Sai Five Kids Statement) केवल संख्या से नहीं, बल्कि सही पहचान से भी जुड़ा है। उन्होंने अपील की कि जनगणना के दौरान धर्म के कॉलम में केवल ‘आदिवासी’ ही लिखवाया जाए। उन्हें डर है कि जनगणना की प्रक्रिया में कोई ‘बाहरी खेल’ हो सकता है जिससे आदिवासियों की वास्तविक गिनती कम दिखाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री और विपक्ष के बीच तीखा टकराव

इस बयान ने राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक की राजनीति को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस मामले में बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि यह नंद कुमार साय का व्यक्तिगत नजरिया है। वे एक सुलझे हुए नेता हैं और समाज की भलाई के लिए ही उन्होंने ऐसी बात कही होगी।

वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार आधिकारिक तौर पर जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय मिशन के खिलाफ है? उन्होंने नंद कुमार साय का 5 बच्चों वाला बयान (Nand Kumar Sai Five Kids Statement) को भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया और सरकार से इस पर स्पष्ट रुख स्पष्ट करने की मांग की।

क्या होगा समाज पर असर Nand Kumar Sai Five Kids Statement

नंद कुमार साय का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में एक कद्दावर आदिवासी चेहरे द्वारा ‘आबादी बढ़ाओ’ का नारा देना एक नए सामाजिक ध्रुवीकरण की ओर इशारा कर रहा है। आदिवासियों के बीच साय की अच्छी पकड़ है, इसलिए उनके इस नंद कुमार साय का 5 बच्चों वाला बयान (Nand Kumar Sai Five Kids Statement) को समाज के भीतर गंभीरता से लिया जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या यह बयान वाकई में आदिवासियों की सामाजिक दिशा बदल देगा या फिर यह केवल एक राजनीतिक सुर्ख़ी बनकर रह जाएगा।


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