Dragon Fruit Farming Profit : ड्रेगन फ्रूट की उन्नत खेती से प्रति एकड़ 1.25 लाख की कमाई

By admin
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Dragon Fruit Farming Profit

Chhattisgarh Agriculture : महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड के ग्राम कुल्हरिया की कृषक (Dragon Fruit Farming Profit) उमा शुक्ला एवं श्री प्रकाश नारायण शुक्ला ने ड्रेगन फ्रूट की उन्नत खेती  के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत की है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत फल क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़कर उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया और उल्लेखनीय आय अर्जित की।

उमा शुक्ला बताती हैं कि पूर्व में वे अपनी 1.62 हेक्टेयर भूमि पर पारंपरिक रूप से धान की खेती करती थीं, जिसमें औसतन 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता था और आय सीमित रहती थी। उनके खेत का 1.00 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित तथा 0.60 हेक्टेयर असिंचित था, लेकिन इसके बावजूद पारंपरिक खेती से अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा था।

उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में शुक्ला दंपत्ति ने अपनी भूमि पर ड्रेगन फ्रूट की उन्नत खेती (Dragon Fruit Farming Profit) प्रारंभ की। उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए पौधरोपण, सिंचाई और पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

पहले ही साल 40 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन

श्रीमती शुक्ला के अनुसार, ड्रेगन फ्रूट की खेती शुरू करने के बाद पहले ही वर्ष में उन्हें लगभग 40 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पाद को महासमुंद एवं बागबाहरा मंडी में लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय किया गया, जिससे उन्हें प्रति एकड़ लगभग 1,25,000 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। ड्रेगन फ्रूट की उन्नत खेती से (Dragon Fruit Farming Profit) के इस मॉडल ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

धान की खेती में आय सीमित Dragon Fruit Farming Profit

वहीं, पूर्व में धान की खेती में प्रति एकड़ कुल आय सीमित थी और लागत निकालने के बाद लाभ बहुत कम बचता था। ड्रेगन फ्रूट की खेती में प्रारंभिक लागत अधिक होने के बावजूद बेहतर बाजार मूल्य और अधिक उत्पादन के कारण कुल लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उमा शुक्ला की इस सफलता (Dragon Fruit Farming Profit) ने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है। उनके प्रयासों को देखकर अन्य कृषक भी पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र में कृषि के स्वरूप में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

 


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