Korba News : कोरबा जिले के ग्राम बिझरा में वन्यजीव संरक्षण (Korba Injured Owl News) के प्रति एक सराहनीय मानवीय पहल देखने को मिली। मुकेश सोरी को अपने खेत में महुआ वृक्ष के नीचे दुर्लभ उल्लू प्रजाति मॉटल्ड वुड आउल (Mottled Wood Owl) का एक बच्चा घायल और असहाय अवस्था में मिला। यह पूरा घटनाक्रम वन्यजीव बचाव अभियान (Wildlife Rescue) का उदाहरण बन गया। पक्षी जमीन पर बैठा हुआ था और उड़ान भरने में असमर्थ प्रतीत हो रहा था, जिससे आशंका जताई गई कि वह किसी कारणवश घायल हो गया है।
घटना (Korba Injured Owl News) की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और त्वरित रेस्क्यू अभियान (Wildlife Rescue) शुरू किया गया। टीम ने सावधानीपूर्वक पक्षी को अपने संरक्षण में लिया ताकि उसे किसी प्रकार का अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे। प्राथमिक परीक्षण में उल्लू की लंबाई लगभग 45 सेंटीमीटर और अनुमानित वजन करीब 700 ग्राम आंका गया। चिकित्सकीय निरीक्षण के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर उपचार हेतु भेजा गया।
रात में करता है अपना शिकार Korba Injured Owl News
विशेषज्ञों के अनुसार मॉटल्ड वुड आउल (Korba Injured Owl News) एक महत्वपूर्ण रात्रिचर शिकारी पक्षी है, जो खेतों और ग्रामीण इलाकों में चूहों तथा अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इस प्रकार के वन्यजीव संरक्षण प्रयास (Wildlife Rescue) न केवल जैव विविधता की रक्षा करते हैं, बल्कि कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं।
इसे नुकसान पहुंचाना अपराध
कोरबा वन मंडलाधिकारी कुमार निशांत ने बताया कि यह प्रजाति Indian Wildlife Protection Act के अंतर्गत संरक्षित है। कानून के तहत किसी भी संरक्षित वन्यजीव को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है, जिसमें कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने से यह वन्यजीव बचाव अभियान (Wildlife Rescue) सफल हो सका और पक्षी को सुरक्षित किया जा सका।
Korba Injured Owl News ग्रामीणों ने दिखाई जागरूकता
ग्रामीणों की सजगता भी इस घटना में महत्वपूर्ण रही। जैसे ही उल्लू (Korba Injured Owl News) घायल अवस्था में दिखाई दिया, उसे स्वयं पकड़ने या छेड़छाड़ करने के बजाय वन विभाग को सूचना दी गई। यह जागरूकता भविष्य में भी वन्यजीव संरक्षण और आपातकालीन रेस्क्यू अभियान (Wildlife Rescue) को प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
वन विभाग ने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि यदि भविष्य में कोई भी वन्यजीव घायल, असहाय या असामान्य स्थिति में दिखाई दे, तो तुरंत विभाग को सूचना दें। स्वयं उपचार या पकड़ने का प्रयास वन्यजीव और व्यक्ति दोनों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की घटनाएं वन्यजीव बचाव तंत्र (Wildlife Rescue) को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रेरित करती हैं।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में परिसर रक्षक राबिन भारद्वाज और परिक्षेत्र सहायक मोहन ठाकुर ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी तत्परता और समन्वित प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया कि पक्षी को सुरक्षित उपचार मिल सके और भविष्य में उसे प्राकृतिक आवास में पुनः छोड़ा जा सके। यह घटना न केवल एक दुर्लभ पक्षी की सुरक्षा का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण जागरूकता, प्रशासनिक तत्परता और प्रभावी वन्यजीव संरक्षण प्रणाली का भी सशक्त संदेश देती है।

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