Chhattisgarh Govt Scheme : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अब सिर्फ खेती (Goat Farming Dhamtari Success Story) ही नहीं, बल्कि पशुपालन भी खुशहाली का नया रास्ता खोल रहा है। धमतरी जिले की ग्राम पंचायत कातलबोड़ में रहने वाली रानी ओझा ने इस बात को सच कर दिखाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही कल्याणकारी योजनाओं ने रानी जैसी हजारों महिलाओं के सपनों को पंख दिए हैं। कभी संसाधनों के अभाव में छोटी सी शुरुआत करने वाली रानी आज एक सफल उद्यमी के रूप में पहचानी जा रही हैं।
मुश्किलों भरा था शुरुआती सफर
रानी ओझा एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। बकरी पालन का शौक तो उन्हें हमेशा से था, लेकिन चुनौतियां पहाड़ जैसी थीं। उनके पास बकरियों को रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं थी। रानी बताती हैं कि पहले बकरियों को खुले आसमान के नीचे या कच्चे झोपड़ों में रखना पड़ता था। बारिश में कीचड़ और सर्दी में ठंड की वजह से अक्सर बकरियां बीमार पड़ जाती थीं। इस अनिश्चितता के कारण पशुपालन (Goat Farming Dhamtari Success Story) उनके लिए फायदे के बजाय चिंता का सबब बन गया था।
योजनाओं के संगम से बदली तस्वीर
रानी की तकदीर तब बदली जब उनकी मेहनत को शासन की योजनाओं का सहारा मिला। जिला प्रशासन ने मनरेगा और जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के अभिसरण (कन्वर्जेंस) के जरिए रानी के लिए एक आधुनिक बकरी शेड को मंजूरी दी। इस बकरी शेड (Goat Farming Dhamtari Success Story) के निर्माण के लिए मनरेगा से करीब 1 लाख 10 हजार रुपये और डीएमएफ से 1 लाख 66 हजार रुपये का सहयोग मिला। कुल 2.76 लाख रुपये की लागत से बना यह शेड रानी के पशुधन के लिए एक सुरक्षित किला बन गया।
11 से 40 तक का कामयाबी भरा सफर
जब सुरक्षित छत मिली, तो रानी का उत्साह भी बढ़ गया। उन्होंने अपनी यात्रा मात्र 11 बकरियों से शुरू की थी। पक्का शेड होने की वजह से अब बकरियों की मृत्यु दर शून्य हो गई और उन्हें समय पर चारा-पानी देना आसान हो गया। बेहतर देखभाल का नतीजा यह रहा कि आज उनके पास 40 से अधिक बकरियां हैं। पशुपालन (Goat Farming Dhamtari Success Story) के इस व्यवसाय ने रानी को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि समाज में उन्हें एक नई पहचान भी दी है।
आत्मनिर्भरता की चमक और बढ़ती आय
रानी के लिए बकरी पालन अब सिर्फ गुजारा करने का माध्यम नहीं, बल्कि मुनाफे का बड़ा जरिया है। बकरियों की समय-समय पर बिक्री से उन्हें जो एकमुश्त राशि मिलती है, उससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। रानी बड़े गर्व से कहती हैं कि अब उन्हें छोटे-मोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। सुरक्षित शेड और शासन की योजनाओं (Goat Farming Dhamtari Success Story) के सहयोग ने उनके भीतर वह आत्मविश्वास भर दिया है, जो एक ग्रामीण महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जरूरी है।
गाँव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
रानी ओझा की सफलता सिर्फ उनकी निजी जीत नहीं है। आज कातलबोड़ और आसपास की महिलाओं के लिए वे एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। उन्हें देखकर गाँव की अन्य महिलाएं भी पशुपालन (Goat Farming Dhamtari Success Story) की ओर आकर्षित हो रही हैं। गाँव के सरपंच और जनप्रतिनिधि भी मानते हैं कि शासन की इन योजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नब्ज पकड़ ली है। बकरी शेड जैसे छोटे दिखने वाले बदलाव वास्तव में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा जरिया बन रहे हैं।
Goat Farming Dhamtari Success Story उम्मीदों की नई राह
रानी अब अपने इस काम को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रही हैं। उनका लक्ष्य बकरियों की संख्या 100 के पार ले जाना है। सुशासन (Goat Farming Dhamtari Success Story) का असली मतलब यही है कि जब सरकारी मदद किसी जरूरतमंद के श्रम से मिलती है, तो परिणाम सुखद होते हैं। रानी ओझा की यह कहानी बताती है कि अगर संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले, तो छत्तीसगढ़ की बेटियां आसमान छूने का दम रखती हैं। सरकार की यह पहल (Goat Farming Dhamtari Success Story) अब गाँव-गाँव में समृद्धि के नए बीज बो रही है।

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