छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कृषि क्षेत्र (Oil Palm Cultivation) के भीतर एक बड़ी क्रांति आकार ले रही है। पारंपरिक फसलों से हटकर अब किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। भारत सरकार और राज्य सरकार की संयुक्त पहल ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पाम’ योजना अब धरातल पर अपना रंग दिखाने लगी है। इस योजना का सबसे सफल उदाहरण महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक के भलेसर गांव में देखने को मिलता है, जहां किसानों ने ऑयल पाम की खेती को अपनाकर अपनी किस्मत बदल ली है।
33 एकड़ बंजर जमीन पर खड़ा किया ‘ग्रीन गोल्ड’
भलेसर गांव के प्रगतिशील किसान मुकेश चंद्राकर के पास 33 एकड़ ऐसी भूमि थी, जो सालों से बंजर पड़ी थी। पारंपरिक खेती के लिए अनुपयुक्त इस जमीन पर उन्होंने रिस्क लेने का फैसला किया। वर्ष 2016 में उन्होंने शासन की योजना से प्रेरित होकर ऑयल पाम की खेती (Oil Palm Cultivation) की शुरुआत की। उन्होंने अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। शुरुआती दौर में उन्हें उद्यानिकी विभाग से भरपूर सहयोग मिला। योजना के तहत उन्हें न केवल उच्च गुणवत्ता वाले पौधे प्रदान किए गए, बल्कि खेतों की फेंसिंग, पौधों के रखरखाव और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली के लिए भारी अनुदान भी मिला।

1 पेड़ से 3000 और 1 एकड़ से सवा लाख
मुकेश चंद्राकर बताते हैं कि पाम के पौधों को तैयार होने में 3 से 4 साल का समय लगता है। एक बार जब पेड़ फल देना शुरू करता है, तो यह सिलसिला अगले 35 वर्षों तक बिना रुके चलता रहता है। वर्तमान में, उनके बगीचे में प्रति पेड़ औसतन 3000 रुपये की वार्षिक आय हो रही है। यदि एकड़ के हिसाब से देखें, तो ऑयल पाम की खेती (Oil Palm Cultivation) से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये का मुनाफा हो रहा है। यह आय धान या अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और सुरक्षित है क्योंकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है और कंपनियों के साथ बाय-बैक एग्रीमेंट की सुविधा भी मिलती है।
आम के आम, गुठलियों के दाम
पाम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पौधों के बीच काफी खाली जगह बचती है। मुकेश ने इस स्थान का सदुपयोग करने के लिए ऑयल पाम की खेती (Oil Palm Cultivation) के साथ अंतरवर्तीय फसलों (Inter-cropping) को बढ़ावा दिया। शुरुआत में उन्होंने पाम के बीच केले की फसल ली, जिससे उन्हें अतिरिक्त 1.5 लाख रुपये का लाभ हुआ। वर्तमान में, वे पाम के साथ कोको की खेती कर रहे हैं। कोको की मांग चॉकलेट और कन्फेक्शनरी कंपनियों में बहुत अधिक है, जिससे उन्हें बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के दोहरी आय प्राप्त हो रही है।
न्यूनतम लागत, अधिकतम सुरक्षा
पाम की खेती उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहां पानी की उपलब्धता कम है। मुकेश चंद्राकर का अनुभव कहता है कि इसमें अन्य फसलों की तुलना में बहुत कम खाद और कीटनाशकों की आवश्यकता होती है। चूंकि यह एक बागवानी फसल है, इसलिए इसमें हर साल जुताई-बुवाई का खर्च भी नहीं आता। ऑयल पाम की खेती (Oil Palm Cultivation) को जंगली जानवरों से भी कम खतरा रहता है, जो छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों के किसानों के लिए एक बड़ी राहत की बात है।
Oil Palm Cultivation रोजगार का सृजन और आत्मनिर्भरता
मुकेश चंद्राकर की यह पहल केवल उनकी निजी आय तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने खेत में दो दर्जन से अधिक स्थानीय ग्रामीणों को स्थायी रोजगार दिया है। स्थानीय मजदूरों का कहना है कि पहले उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों या शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था, लेकिन अब ऑयल पाम की खेती (Oil Palm Cultivation) की वजह से उन्हें साल के 12 महीने अपने ही गांव में काम मिल रहा है।
Oil Palm Cultivation प्रशासनिक सहयोग और भविष्य की राह
सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग पायल साव ने बताया कि भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का अधिकांश खाद्य तेल आयात करता है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए महासमुंद जिले में लगभग 400 किसान 450 हेक्टेयर में इस योजना का लाभ ले रहे हैं। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अपील की है कि वे अपनी अनुपयोगी या कम उपजाऊ भूमि पर पाम लगाएं। पाम का उपयोग केवल तेल तक सीमित नहीं है; इसका इस्तेमाल साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन और दवाइयों में भी होता है, जिससे इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है।

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