किंकारी डैम का विश्राम गृह खंडहर में तब्दील, कभी पर्यटकों से गुलजार रहने वाली जगह पर पसरा सन्नाटा

बरमकेला के पास स्थित किंकारी जलाशय अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां बना विश्राम गृह वर्षों से बदहाली का शिकार है। दीवारों में दरारें, टूटे झूले और बिखरा सामान इसकी हालत बयां कर रहे हैं। पर्यटन मंडल के अधीन रहने के बाद भी सुधार नहीं हुआ। अब एक बार फिर बजट में जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भेजा गया है।

Story Highlights
  • वर्ष 1982 में बने किंकारी जलाशय के विश्राम गृह की हालत जर्जर
  • पर्यटन मंडल के अधीन रहने के दौरान भी नहीं हुआ भवन का जीर्णोद्धार
  • जल संसाधन विभाग ने फिर बजट में सुधार कार्य शामिल करने का प्रस्ताव भेजा

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पर्यटन की संभावनाओं से भरा किंकारी जलाशय प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। बरमकेला विकासखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर ग्राम धौरादरहा स्थित जलाशय का विश्राम गृह देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका है। भवन की दीवारों में दरारें हैं, खिड़की-दरवाजे टूट चुके हैं और अंदर का सामान भी खराब हालत में पड़ा है। कभी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा यह स्थान अब बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है।

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1982 में हुआ था निर्माण

किंकारी जलाशय का निर्माण अविभाजित मध्यप्रदेश शासनकाल में वर्ष 1982 में कराया गया था। इसका जल क्षेत्रफल 208 हेक्टेयर और सिंचाई क्षमता 4,048 हेक्टेयर है। बड़े जलाशय और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण दूर-दराज से लोग यहां घूमने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।

पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने यहां विश्राम गृह और झूलों का निर्माण कराया था। वर्ष 2000 में भवन की मरम्मत के लिए स्वीकृति भी मिली, लेकिन अपरिहार्य कारणों से काम नहीं हो सका। इसके बाद से भवन की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

Kinkari Dam Rest House
Kinkari Dam Rest House

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दीवारों में दरारें, सामान खराब

विश्राम गृह की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। खिड़की और दरवाजे टूट चुके हैं। कमरों की बिजली वायरिंग उखड़ गई है। अलमारी और बिस्तर सहित अन्य सामान भी खराब हालत में बिखरा पड़ा है।

भवन के सामने बनी सीमेंट की कुर्सियां टूट चुकी हैं और बच्चों के लिए लगाए गए झूले भी खराब हो गए हैं। छत पर जाने वाली सीढ़ियां और रेलिंग के पाइप तक क्षतिग्रस्त हैं। आसपास फैली गंदगी और बदबू के कारण पर्यटक भवन के भीतर जाने से भी कतराते हैं। पिकनिक मनाने पहुंचने वाले लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है।

 

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Kinkari Dam Rest House
Kinkari Dam Rest House

मंत्री तक पहुंची थी शिकायत

विश्राम गृह की बदहाली को लेकर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता ताराचंद पटेल ने तत्कालीन सिंचाई मंत्री रविंद्र चौबे को पत्र लिखकर भवन के जीर्णोद्धार की मांग की थी। उस समय जल संसाधन विभाग बरमकेला की ओर से भी मरम्मत और सुधार के लिए प्राक्कलन तैयार कर प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि, अब तक भवन की मरम्मत नहीं हो सकी।

 

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पर्यटन मंडल भी नहीं करा सका सुधार

करीब चार साल पहले विश्राम गृह को पर्यटन मंडल के अधीन कर दिया गया था। लेकिन वहां भी न तो भवन का जीर्णोद्धार कराया गया और न ही नियमित देखरेख हो सकी। बाद में इसे फिर से जल संसाधन विभाग को वापस कर दिया गया।

पिछले बजट सत्र में भी भवन के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिल पाई। अब एक बार फिर इसे बजट में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

जल संसाधन विभाग बरमकेला के एसडीओ ईश्वर दत्त भगत ने बताया कि किंकारी डैम के विश्राम गृह में सुधार के लिए इस बार भी बजट में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है।

 

 

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