Balod News : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मेढ़की गांव में सामाजिक अनुशासन (Village Social Rules) और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए ग्रामीणों ने एक अनोखा और सख्त सामूहिक निर्णय लिया है। गुरुवार सुबह आयोजित ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि गांव में चुगलीबाजी और लोगों के बीच विवाद फैलाने वालों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यह फैसला गांव की नई सामाजिक व्यवस्था यानी सामाजिक नियम के रूप में लागू किया गया है।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने माना कि पिछले कुछ समय से आपसी गलतफहमियों और अफवाहों के कारण रिश्तों में तनाव बढ़ रहा था। इसी समस्या को समाप्त करने के लिए ग्रामसभा ने गांव की सामाजिक व्यवस्था (Village Social Rules) को मजबूत करने का निर्णय लिया। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति किसी की निजी या सार्वजनिक बातों को तोड़-मरोड़कर दूसरे के सामने पेश करता है या विवाद भड़काने की कोशिश करता है, तो उस पर ₹5000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि चुगली और अफवाहें अक्सर छोटे विवादों को बड़े झगड़ों में बदल देती हैं। इसलिए अब आपसी विवाद रोकने की पहल (Village Social Rules) के तहत सामूहिक जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि गांव का माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
Village Social Rules गांव में नशे के खिलाफ भी सख्ती
बैठक में केवल चुगली पर ही नहीं बल्कि सामाजिक आयोजनों की मर्यादा बनाए रखने पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि सामाजिक या धार्मिक भोज में यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर पहुंचेगा, तो उसके खिलाफ भी ₹5000 का जुर्माना लगाया जाएगा। यह नियम भी सामुदायिक अनुशासन व्यवस्था (Village Social Rules) का हिस्सा बनाया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, नशे की वजह से कई बार कार्यक्रमों में विवाद और असामाजिक घटनाएं सामने आती हैं। इसलिए सामूहिक सहमति से यह नियम लागू किया गया ताकि आने वाली पीढ़ियों को सकारात्मक वातावरण मिल सके।
पांच साल पहले भी लिया गया था बड़ा फैसला
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब गांव ने सामूहिक निर्णय लिया हो। लगभग पांच वर्ष पूर्व भी गांव में बढ़ते नशे के खिलाफ बैठक आयोजित की गई थी। उस समय शराब बेचने वालों के खिलाफ ₹10,000 का आर्थिक दंड तय किया गया था। साथ ही सूचना देने वाले व्यक्ति को ₹1,000 पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया था। अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ग्राम सामाजिक सुधार मॉडल (Village Social Rules) को और मजबूत किया गया है।
भाईचारे को मजबूत करने की कोशिश
ग्रामवासियों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली और सोशल मीडिया के दौर में गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं। ऐसे में गांव स्तर पर सामाजिक नियम बनाना जरूरी हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यह फैसला किसी को दंडित करने के लिए नहीं बल्कि समाज में विश्वास और सम्मान कायम रखने के लिए लिया गया है।
बैठक में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। सभी ने एकमत से कहा कि गांव की शांति और एकता सर्वोपरि है। ग्रामीणों का विश्वास है कि यह पहल भविष्य में अन्य गांवों के लिए भी उदाहरण बन सकती है और सामाजिक समरसता को नई दिशा दे सकती है।







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