छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नक्सलवाद (Naxalism High Level Meeting) को लेकर केंद्र सरकार की अब तक की सबसे अहम बैठकों में से एक की शुरुआत हो चुकी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रायपुर के मेफेयर होटल में नक्सलवाद पर हाईलेवल समीक्षा बैठक ले रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब नक्सली खात्मे की तय समयसीमा बेहद नजदीक आ चुकी है और केंद्र सरकार की रणनीति निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तीन दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने नक्सलवाद को लेकर उच्चस्तरीय मंथन शुरू किया। बैठक के पहले सत्र में खुफिया एजेंसियों से मिले इंटेलिजेंस इनपुट्स की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। इसमें हाल के नक्सली मूवमेंट, सुरक्षाबलों के ऑपरेशंस, नक्सलियों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क पर चर्चा हो रही है। इस समीक्षा बैठक (Naxalism High Level Meeting) को बेहद गोपनीय और रणनीतिक माना जा रहा है।
जमीनी स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी
बैठक के दूसरे सत्र में छत्तीसगढ़ समेत अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों की जमीनी स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेष रूप से बस्तर संभाग, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर जैसे इलाकों में चल रहे अभियानों की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाएगी। सुरक्षाबलों को किन इलाकों में और किस तरह की रणनीति अपनानी है, इस पर भी गहन मंथन किया जा रहा है।
(Naxalism High Level Meeting) सीएम समेत कई अधिकारी मौजूद
इस हाईलेवल बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, छत्तीसगढ़ के एसीएस गृह, राज्य और केंद्र के खुफिया विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, CRPF, BSF और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के डीजीपी, साथ ही कई नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी भी मौजूद हैं। यह सुरक्षा समन्वय बैठक (Naxalism High Level Meeting) इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इसमें राज्यों और केंद्र के बीच ऑपरेशनल तालमेल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
खात्मे की डेडलाइन को अब केवल 51 दिन शेष
छत्तीसगढ़ में नक्सली खात्मे (Naxalism High Level Meeting) की डेडलाइन को अब केवल 51 दिन शेष हैं। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का ऐलान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया था। इसके बाद से ही केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ सुरक्षाबल लगातार संयुक्त अभियान चला रहे हैं। हाल के महीनों में नक्सल प्रभावित इलाकों में कई बड़े ऑपरेशंस हुए हैं, जिनमें सुरक्षाबलों को उल्लेखनीय सफलता भी मिली है।
अमित शाह (Naxalism High Level Meeting) का यह दौरा इसी डेडलाइन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस रणनीतिक बैठक (Naxalism High Level Meeting) में आगामी 50 दिनों के लिए माइक्रो लेवल एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। किस इलाके में किस स्तर की फोर्स तैनात होगी, किन नक्सली कमांडरों पर फोकस रहेगा और किन ऑपरेशंस को प्राथमिकता दी जाएगी, इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
बस्तर दौरे पर भी जाएंगे शाह
हाईलेवल बैठक के बाद अमित शाह बस्तर संभाग के दौरे पर भी जाएंगे। वे बस्तर में आयोजित पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान उनका स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों से भी संवाद प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि वे जमीनी स्तर पर चल रही योजनाओं और विकास कार्यों की भी समीक्षा कर सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले अमित शाह 28 से 30 नवंबर के बीच नवा रायपुर स्थित IIM परिसर में आयोजित 60वें DGP-IGP सम्मेलन में भी शामिल हो चुके हैं। उस दौरान भी नक्सलवाद, आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। मौजूदा हाईलेवल मंथन (Naxalism High Level Meeting) को उसी रणनीति की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही यह निर्णायक लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले 51 दिन यह तय करेंगे कि केंद्र सरकार की यह समयसीमा किस हद तक जमीनी हकीकत में बदल पाती है।







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