Labour Inspector Dismissed : रिश्वत लेने का दोषी श्रम निरीक्षक बर्खास्त

भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार ने रिश्वत मांगने के आरोप में दोषी पाए गए श्रम निरीक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विशेष न्यायालय से सजा मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया।

By admin
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Labour Inspector Dismissed
Highlights
  • रिश्वत प्रकरण में दोष सिद्ध होने पर श्रम निरीक्षक सेवा से बर्खास्त
  • विशेष न्यायालय ने सुनाई 3 वर्ष कठोर कारावास और जुर्माना
  • राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभागीय कार्रवाई

Anti Corruption Action : राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त संदेश देते हुए रिश्वत लेने के दोषी (Labour Inspector Dismissed) पाए गए श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई शासन की भ्रष्टाचार के प्रति अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है, जिसे प्रशासनिक स्तर पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सुरेश कुर्रे जशपुर जिले में पदस्थापना के दौरान रिश्वत मांगने के मामले में दोषी पाए गए थे। विशेष न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद श्रम विभाग ने विभागीय नियमों के तहत सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई (Labour Inspector Dismissed) से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

यह पूरा मामला वर्ष 2019 का है, जब जशपुर जिले में श्रम निरीक्षक (Labour Inspector Dismissed)  के रूप में कार्यरत रहते हुए सुरेश कुर्रे पर छत्तीसगढ़ अभिनंदन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी, कोतबा द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। संस्था द्वारा संचालित मेशन जनरल एवं असिस्टेंट इलेक्ट्रीशियन कोर्स में 320 प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण कार्य के एवज में कथित रूप से अवैध राशि की मांग की गई थी।

संस्था के संचालक रमेश कुमार यादव ने 26 सितंबर 2019 को एंटी करप्शन ब्यूरो, बिलासपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर की गई जांच में आरोप सही पाए गए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत अपराध दर्ज किया गया। जांच एजेंसियों की कार्रवाई (Labour Inspector Dismissed) के बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

Labour Inspector Dismissed जशपुर की अदालत में हुई सुनवाई

विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) जशपुर की अदालत में विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2021 के तहत सुनवाई हुई। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 26 नवंबर 2025 को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए सुरेश कुर्रे को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय के इस निर्णय को प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम (Anti Corruption Action) माना जा रहा है।

न्यायालय का निर्णय श्रमायुक्त के संज्ञान में आने के बाद कार्यालय श्रमायुक्त, छत्तीसगढ़ ने विभागीय प्रक्रिया पूरी करते हुए 15 जनवरी 2026 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, सुरेश कुर्रे को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पृथक कर दिया गया। सेवा समाप्ति के समय उनकी पदस्थापना श्रम पदाधिकारी कार्यालय, जिला कोण्डागांव में थी।

Labour Inspector Dismissed सरकार नहीं बरत रही ढिलाई

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि राज्य शासन भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरत रहा है। जीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई (Anti Corruption Action) सुनिश्चित की जा रही है, ताकि शासकीय तंत्र में ईमानदारी और पारदर्शिता बनी रहे। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सख्त कार्रवाई से सरकारी विभागों में जवाबदेही बढ़ती है और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश मिलता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर रुख अपनाने के संकेत दे चुकी है।

 

 


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