Parliament Number Game : लोकतंत्र के इतिहास में बड़े बदलाव (Special Parliament Session 2026) की चर्चा के बीच लोकसभा में भारत सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। सरकार द्वारा पेश किए गए प्रस्तावित विधेयकों को लेकर सदन का माहौल गरमाया हुआ है और संख्या बल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
विपक्ष का दावा है कि सरकार के पास आवश्यक समर्थन नहीं है, जबकि सरकार सहयोगी दलों के भरोसे बिल पास कराने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी ने भी सदन में कहा है कि विपक्ष इन विधेयकों को पास नहीं होने देगा, जिससे टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
सरकार की ओर से पेश किए गए विधेयकों को लेकर चर्चा जारी है और इनका असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो सीटों की संख्या में बढ़ोतरी और महिलाओं के लिए आरक्षण का रास्ता खुल सकता है। ऐसे में संसद के भीतर संख्या बल और सहयोगी दलों का रुख बेहद अहम हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान की स्थिति बनी तो पूरा समीकरण बदल सकता है और सरकार को अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
इन तीनों बिल पर बहस Special Parliament Session 2026
केंद्र सरकार ने सदन के पटल पर बीते गुरुवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 रखे। इन्हीं पर आज भी लोकसभा में चर्चा जारी है। केंद्र सरकार का इन तीनों बिलों को लेकर लक्ष्य है कि साल 2029 के लोकसभा चुनाव तक इन्हें लागू करना है। अगर यह बिल लागू हो जाते हैं तो लोकसभा की मौजूदा सीटें 543 से बढ़कर 850 तक होने के प्रावधान और महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के लिए रास्ता साफ हो जाएगा।
विशेष संसद सत्र (Special Parliament Session 2026) के दौरान इस प्रस्ताव को बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इसके लिए जनगणना और परिसीमन की प्रोसेस बहुत अहम मानी जा रही है और विशेष संसद सत्र (Special Parliament Session 2026) में इसी पर विस्तृत चर्चा जारी है।
क्या है बिल पास कराने का नंबर गेम?
इस बीच विपक्ष के सूत्रों ने बताया कि इस बिल को सदन से पास कराने के लिए कम से कम 345 सांसदों का समर्थन होना जरूरी है। लेकिन उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में सरकार के पास करीब 302 सांसदों का ही सपोर्ट है। विशेष संसद सत्र (Special Parliament Session 2026) में संख्या बल को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
इस वजह से इन्हें लागू कराने के लिए सरकार के पास जरूरी आंकड़ा कम है। सरकार के पास कम बहुमत होने की वजह से आने वाले समय में राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है और विशेष संसद सत्र (Special Parliament Session 2026) के दौरान मतदान की स्थिति अहम मानी जा रही है।
अनुप्रिया पटेल ने क्या कहा Parliament Number Game
अपना दल (एस) की सांसद अनुप्रिया पटेल ने इन तीनों बिलों का सपोर्ट किया है और इसके साथ ही कहा कि लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि आज भी सदन में सिर्फ 14 प्रतिशत महिलाएं हैं, वो भी निराशाजनक स्थिति में है, जिसे बदलने की बहुत जरूरी है।
विशेष संसद सत्र (Special Parliament Session 2026) के दौरान उन्होंने महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संतुलन के लिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है और विशेष संसद सत्र (Special Parliament Session 2026) इस दिशा में अहम अवसर साबित हो सकता है।

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