Chit Fund Companies : छत्तीसगढ़ में चिटफंड कंपनियों (Chit Fund Companies) के सुनहरे झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने वाले लाखों निवेशकों के लिए न्याय की राह अब भी बेहद पथरीली बनी हुई है। राज्य के करीब 26 लाख निवेशकों को रकम दोगुना करने का लालच (Chit Fund Scam Chhattisgarh) देकर सात हजार से अधिक कंपनियां 6,834 करोड़ रुपये की चपत लगाकर रफूचक्कर हो गईं। हैरानी की बात यह है कि सालों बीत जाने के बाद भी 20 लाख से अधिक आवेदन (Applications) प्रशासन के पास लंबित पड़े हैं और पीड़ित अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
मात्र 73 हजार निवेशकों को मिली राहत Chit Fund Companies
सरकारी आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड (Chit Fund Scam Chhattisgarh) के विश्लेषण से पता चलता है कि ठगी का शिकार हुए 25.72 लाख निवेशकों ने अपनी डूबी हुई रकम वापसी के लिए गुहार लगाई थी। पिछली कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान बड़े-बड़े वादे तो किए गए, लेकिन धरातल पर केवल 73 हजार निवेशकों को ही उनकी राशि का कुछ हिस्सा वापस मिल सका। प्रशासन ने अब तक कुल प्राप्त आवेदनों में से केवल 5.16 लाख का ही निराकरण (Disposal) किया है, जबकि एक बड़ा हिस्सा आज भी फाइलों में दबा हुआ है।
710 आरोपी गिरफ्तार, 214 कंपनियों पर FIR
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय रही 214 फर्जी कंपनियों (Chit Fund Scam Chhattisgarh) के विरुद्ध अब तक 468 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस घोटाले के सिलसिले में पुलिस ने अब तक 710 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है। हालांकि, निवेशकों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी से उनका काम नहीं चलेगा; जब तक उनकी मेहनत की कमाई वापस नहीं मिल जाती, तब तक यह कार्रवाई अधूरी है।
संपत्तियों की कुर्की में देरी बनी बड़ी बाधा
नियमों के मुताबिक, ठगी करने वाली कंपनियों की संपत्तियों को कुर्क (Attachment of Property) कर उससे प्राप्त राशि को निवेशकों में बांटा जाना चाहिए। लेकिन कानूनी पेचीदगियों और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कुर्की (Chit Fund Scam Chhattisgarh) की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा था, लेकिन आज 2026 में भी अधिकांश ठगी पीड़ित “बाट जोह” रहे हैं।
छत्तीसगढ़ (Chit Fund Scam Chhattisgarh) के हजारों मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों ने अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई और बुढ़ापे के सहारे के लिए इन कंपनियों में निवेश किया था। अब देखना यह होगा कि वर्तमान सरकार इन 20 लाख लंबित अर्जियों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती है।

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