Crusher Pollution Impact on Students : जम्बो क्रशर के पास स्कूल और छात्रावास, धूल से बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बोंदा क्षेत्र में संचालित क्रशर उद्योग से उड़ने वाली धूल के कारण स्कूल और छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। महज 200 मीटर दूरी पर स्थित शैक्षणिक संस्थानों तक डस्ट पहुंचने से कक्षाओं और परिसर में प्रदूषण की समस्या सामने आ रही है।

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Crusher Pollution Impact on Students
Highlights
  • क्रशर से मात्र 200 मीटर दूरी पर स्थित हैं स्कूल और छात्रावास
  • कक्षाओं, भवनों और पेड़-पौधों पर जम रही धूल की मोटी परत
  • छात्रावास तक पहुंच रही क्रशर की धूल, बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

RAIGARH News : सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कटंगपाली–साल्हेओना क्षेत्र में संचालित क्रशर उद्योगों (Crusher Pollution Impact on Students) से फैल रहे प्रदूषण को लेकर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। बोंदा पंचायत के पास संचालित आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स क्रशर से उड़ने वाली धूल आसपास के स्कूल और छात्रावास तक पहुंच रही है, जिससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों के इतने करीब क्रशर संचालन होने से क्रशर प्रदूषण का छात्रों पर असर साफ दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार इस क्रशर संस्थान के बेहद करीब बोंदा पंचायत का शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, मिडिल स्कूल तथा बालक और बालिका छात्रावास स्थित हैं। इन संस्थानों की दूरी क्रशर से लगभग 200 मीटर बताई जा रही है। इतनी कम दूरी होने के कारण क्रशर से उड़ने वाली धूल सीधे स्कूल परिसर और छात्रावास भवनों तक पहुंच रही है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण क्षेत्र में क्रशर प्रदूषण का छात्रों पर असर (Crusher Pollution Impact on Students) को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

 

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Crusher Pollution Impact on Students कक्षाओं में जम रही धूल की परत

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रशर से निकलने वाली डस्ट हवा के साथ स्कूल परिसर तक पहुंच जाती है। कई बार कक्षाओं की खिड़कियों और रोशनदानों से होकर धूल अंदर तक चली जाती है।

ग्रामीणों का दावा है कि कक्षाओं की मेज-कुर्सियों, खिड़कियों और फर्श पर धूल की मोटी परत जम जाती है। इससे बच्चों को पढ़ाई के दौरान असुविधा होती है। शिक्षक भी इस समस्या से परेशान बताए जा रहे हैं। इस स्थिति के कारण क्रशर प्रदूषण का छात्रों पर असर (Crusher Pollution Impact on Students) लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

पेड़-पौधे और भवन भी डस्ट से ढके

क्रशर से उड़ने वाली धूल का असर केवल कक्षाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के पेड़-पौधों और भवनों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। स्कूल परिसर और छात्रावास के आसपास लगे पेड़-पौधे सफेद डस्ट से ढके नजर आते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि भवनों की दीवारों और छतों पर भी धूल की परत जम जाती है। इससे पूरे परिसर का वातावरण प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए क्रशर प्रदूषण का छात्रों पर असर (Crusher Pollution Impact on Students) को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।

 

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Crusher Pollution Impact on Students सरपंच ने जताई चिंता

बोंदा पंचायत के सरपंच और शाला प्रबंधन विकास समिति के अध्यक्ष गोवर्धन निषाद ने भी इस समस्या को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि क्रशर की स्थापना के समय भी ग्रामीणों ने विरोध किया था, लेकिन उस समय उनकी बातों को अनदेखा कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में क्रशर से उड़ने वाली धूल स्कूल और छात्रावास तक पहुंच रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है। सरपंच ने स्पष्ट कहा कि यदि क्रशर विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो इसका विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। इसी कारण क्षेत्र में क्रशर प्रदूषण का छात्रों पर असर (Crusher Pollution Impact on Students) को लेकर आवाज उठने लगी है।

विस्तार से बढ़ सकती है समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्रशर का विस्तार किया जाता है तो पत्थर क्रशिंग की गतिविधियां और अधिक बढ़ जाएंगी। इससे धूल और प्रदूषण का स्तर भी बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्तमान स्थिति में ही स्कूल और छात्रावास के बच्चों को परेशानी हो रही है। ऐसे में उत्पादन बढ़ने पर धूल की मात्रा और अधिक बढ़ सकती है, जिससे क्रशर प्रदूषण का छात्रों पर असर (Crusher Pollution Impact on Students) और गंभीर रूप ले सकता है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए।

आरोप बेबुनियाद व निराधार है

इस संंबंध में जब क्रशर संंचालक सुनील अग्रवाल से चर्चा की गई तो उन्होंने इन आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत की गई थी। मामले की जांच हुई थी, लेकिन शिकायत सही नहीं पाए गए थे। अब विस्तार हो रहा है तो कुछ लोग बेवजह के झूठे व मनगंठत आरोप लगा रहे हैं।

 

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