कृषि समाचार

Fish Farming Income : मनरेगा से बनी डबरी ने बदली किसान की किस्मत, मछली पालन से हर साल हो रही लाखों रुपये की कमाई

Bijapur News : ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से (Fish Farming Income) बीजापुर जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना (MGNREGA) के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा लगभग 1,000 आजीविका डबरियों को स्वीकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्ष 2025-26 में अब तक 9 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से 431 आजीविका डबरियाँ स्वीकृत की जा चुकी हैं।

आजीविका डबरियों के निर्माण से न केवल किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है, बल्कि जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिल रहा है। इन डबरियों के माध्यम से किसान खेती के साथ-साथ बागवानी और मत्स्य पालन (Fish Farming Income) जैसी गतिविधियों से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।

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मेहनत ने लिखी सफलता की कहानी

बीजापुर जिले की ग्राम पंचायत गंगालूर के किसान रैनधर राणा ने आजीविका डबरी (Fish Farming Income) का प्रभावी उपयोग कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी डबरी में मत्स्य पालन कर लगभग 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त की है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी एक एकड़ कृषि भूमि में लगभग 25 मिश्रित फलदार पौधों का रोपण किया है, जिनमें आम और अमरूद प्रमुख हैं।

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तकनीकी सहायक तोरण लाल उर्वशा ने बताया कि रैनधर राणा द्वारा वर्ष 2021-22 में 1 लाख 60 हजार रुपये की लागत से आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया था। यह डबरी अब उनकी आय वृद्धि और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। डबरी का आकार 20 मीटर लंबाई, 20 मीटर चौड़ाई और 2.5 मीटर गहराई का है। वर्तमान में किसानों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 3 मीटर गहराई की डबरियाँ भी निर्मित की जा रही हैं।

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रोजगार सहायक प्रताप सेमल ने बताया कि डबरी निर्माण (Fish Farming Income) कार्य के दौरान लगभग 800 मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ। महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियाँ ग्रामीण किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और स्थायी कृषि को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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