Baramkela News : सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जनपद पंचायत बरमकेला के अंतर्गत ग्राम पंचायत गौरडीह (Panchayat Secretary Embezzlement) में वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला उजागर हुआ है। पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पूर्व सचिव रामनाथ नायक ने ग्राम पंचायत के खाते से अवैध रूप से 2 लाख 56 हजार 200 रुपये का आहरण कर लिया। यह रकम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बरमकेला शाखा से निकाली गई थी।
जानकारी के मुताबिक, पूर्व सचिव ने महिला सरपंच को धोखे में रखकर उनके नाम का दुरुपयोग किया और फर्जी तरीके से धन निकासी की साजिश रची। सरपंच को यह बताया गया कि आवेदक के खाते में कुछ तकनीकी त्रुटि हो गई है, जिसके सुधार के लिए उनके मोबाइल पर ओटीपी आएगा। सचिव ने सरपंच से वह ओटीपी साझा करने को कहा और उसी का इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाल ली।
ग्राम पंचायत गौरडीह की आदिवासी महिला सरपंच सचिव की बातों में आ गईं और उन्होंने अनजाने में ओटीपी साझा कर दिया। इसके बाद पंचायत खाते से (Panchayat Secretary Embezzlement) सीधे 2.56 लाख की निकासी कर ली गई। इस गबन का खुलासा तब हुआ जब नए सचिव ने प्रभार संभाला और पाया कि बिना पंचायत प्रस्ताव और बिना किसी अनुमति के खाते से यह बड़ी रकम निकाली गई थी।
पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पूर्व सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरपंच की अनभिज्ञता का फायदा उठाया और गबन की इस गंभीर हरकत को अंजाम दिया। ग्रामवासियों ने इस घटना को सीधी-सीधी वित्तीय धोखाधड़ी करार दिया है। ग्राम पंचायत सदस्यों ने जिला पंचायत सीईओ को लिखित शिकायत देकर मांग की है कि दोषी सचिव के खिलाफ तत्काल विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए तथा गबन की गई रकम वापस ग्राम पंचायत गौरडीह के खाते में जमा कराई जाए।
महिला सरपंच ने दी आंदोलन की चेतावनी (Panchayat Secretary Embezzlement)
इधर, सरपंच गुलाबी बरिहा ने मीडिया से कहा कि वे आदिवासी महिला हैं और पहली बार सरपंच बनी हैं। सचिव ने उन्हें धोखे में रखकर उनके नाम पर यह फर्जीवाड़ा किया है, जिसके चलते अब संदेह की स्थिति उनके ऊपर भी बन रही है। सरपंच ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पूर्व सचिव परउचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे मजबूरन धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगी।
इस पूरे मामले ने पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह के मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। फिलहाल जिला प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह शीघ्र हस्तक्षेप कर गबन की गई राशि की वसूली सुनिश्चित करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।