राजधानी टाइम्स छत्तीसगढ़, 10 जुलाई : छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लाक अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर लेन्धरा में गुरु पूर्णिमा पर्व (Guru Purnima celebration) पर आयोजित गुरु पूजन समारोह में शिक्षा, संस्कृति और श्रद्धा का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत हिंदू परंपरा के अनुसार प्रथम गुरु वेदव्यास की विधिवत पूजा से की गई। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का तिलक लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। विद्यालय अध्यक्ष भूतनाथ पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि, “इस संसार में गुरु ही वह शक्ति है जो अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती है। आप सभी सौभाग्यशाली हैं जिन्हें इस जीवन में गुरु (Guru Purnima celebration) बनने का अवसर मिला है।” उन्होंने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है।
Guru Purnima celebration संस्कारों की नींव सरस्वती शिशु मंदिर में पड़ी
गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य डा. अभिलाषा नायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि उन्होंने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से प्राप्त की है। उन्होंने कहा, “शिक्षा तो हर स्कूल में मिलती है, लेकिन जो संस्कार मुझे सरस्वती शिशु मंदिर से मिले, वही आज मुझे परिवार और समाज में अपने दायित्व निभाने की ताकत देते हैं।” उनके वक्तव्य ने पूरे परिसर में भावनात्मक ऊर्जा भर दी।
गुरुजनों का गणवेश पहनाकर हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की ओर से सभी आचार्यों और दीदियों को गणवेश भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच पर लेन्धरा मंडल अध्यक्ष शारदा शोभाचंद मालाकार ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि, “आज गुरुजनों का सम्मान कर खुद को गौरवांवित महसूस कर रही हूं। गुरु हमारे जीवन के प्रेरणास्त्रोत होते हैं।”
कार्यक्रम का संचालन आचार्य नरेश डनसेना ने भावपूर्ण अंदाज में किया, जबकि आभार प्रदर्शन विद्यालय प्राचार्य संजय साहू द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य चूड़ामणि मालाकार, लिंगराज नायक और दीदियों में लक्ष्मी यादव, बबली पाणीग्राही, योगेश्वरी डनसेना, अंजली भोय, लक्ष्मीन यादव, पुष्पांजलि कर्ष, खीरमती प्रधान और बासना सेठ सहित अनेक शिक्षकगण व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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