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मरीजों से वसूली से लेकर फर्जी मोबाइल नंबर तक का खेल! छत्तीसगढ़ के इस अस्पताल पर गिरी बड़ी गाज

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान एक निजी अस्पताल में ऐसी अनियमितताएं मिलीं, जिन्हें नजरअंदाज करना मरीजों के साथ बड़ा अन्याय होता। कहीं मरीजों के परिजनों से इलाज के नाम पर नगद राशि लेने के बयान मिले, तो कहीं अस्पताल की भर्ती फाइलों में दर्ज मोबाइल नंबर ही गलत पाए गए।

जांच में नवजात शिशुओं के उपचार से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन एक साल के लिए निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद अब अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती नहीं कर सकेगा। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को परिसर में लगी योजना से संबंधित सभी प्रचार-प्रसार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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औचक निरीक्षण में खुलीं एक के बाद एक गड़बड़ियां

जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया था। अस्पताल का आयुष्मान योजना पंजीयन क्रमांक HOSP22P147364 है। निरीक्षण के दौरान टीम को कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं।

जांच में मरीजों के परिजनों के ऐसे बयान सामने आए, जिनमें अस्पताल में नगद राशि लिए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा भर्ती मरीजों के अभिलेखों में गलत मोबाइल नंबर दर्ज पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भर्ती फाइलों में दर्ज 68 मोबाइल नंबर गलत अथवा उपयोग में नहीं थे। ऐसे में मरीजों के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए।

 

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नवजात बच्चों के उपचार और जांच रिकॉर्ड पर भी सवाल

जांच टीम को नवजात शिशुओं के उपचार से संबंधित अनियमितताएं भी मिलीं। इसके अलावा पैथोलॉजी और अल्ट्रासोनोग्राफी से जुड़े जरूरी अभिलेख भी अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा सका। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इन रिकॉर्ड का उपलब्ध नहीं होना जांच के दौरान गंभीर विषय माना गया।

आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों को मरीजों के उपचार, जांच और भर्ती से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। ऐसे में मरीजों के परिजनों से नगद राशि लेने की शिकायत, गलत मोबाइल नंबर और जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड का अभाव कई सवाल खड़े करता है।

 

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नोटिस का जवाब भी नहीं आया काम

निरीक्षण में मिली गड़बड़ियों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि अस्पताल की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक और उपलब्ध तथ्यों के अनुरूप नहीं पाया गया। मरीजों से संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई का फैसला लिया।

 

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नए मरीज नहीं ले सकेगा अस्पताल

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस. एन. केशरी के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत कार्रवाई की गई है। इसके अंतर्गत हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, कटघोरा का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पंजीयन एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान अस्पताल योजना के अंतर्गत नए मरीजों को भर्ती नहीं कर सकेगा। इसके अलावा अस्पताल और उसके परिसर में आयुष्मान योजना से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्री भी हटानी होगी।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज देने वाले निजी अस्पतालों की जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है। गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज के नाम पर यदि कहीं अनियमितताएं होती हैं, तो उसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।

 

 

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