Turmeric Farming : ‘पीली क्रांति’ की शुरुआत, छत्तीसगढ़ का नगरी बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब

हल्दी की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए धमतरी में 250 किसानों ने 10 टन गुणवत्तायुक्त बीज खरीदे हैं। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रसंस्करण और संगठित विपणन की इस पहल से 250 टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

By admin
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Turmeric Farming

हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) अब किसानों की आय बढ़ाने का नया जरिया बनने जा रही है। गुणवत्तायुक्त बीज, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रसंस्करण और संगठित विपणन की मदद से हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) को नई पहचान देने की तैयारी है। इसी कड़ी में किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

250 किसानों ने खरीदे 10 टन गुणवत्तायुक्त बीज

हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) को बढ़ावा देने के लिए अब तक 250 किसानों ने 10 टन गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज (राइजोम) खरीदे हैं। इन बीजों से करीब 270 दिनों में 250 टन हल्दी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। खेती के हर चरण में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और फील्ड सपोर्ट भी दिया जाएगा।

Turmeric Farming धमतरी में किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम कोर्रेमुडा में आयोजित किया गया। जिला पंचायत, जनपद पंचायत नगरी और प्रदान (PRADAN) संस्था के संयुक्त सहयोग से हुए इस प्रशिक्षण में नगरी और मगरलोड विकासखंड के कृषि मित्रों तथा पीआरपी ने भाग लिया।

खेती से लेकर प्रसंस्करण तक दी गई पूरी जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) के लिए भूमि की तैयारी, रोगमुक्त बीज का चयन, बीज उपचार, पोषण प्रबंधन, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, फसल संरक्षण, वैज्ञानिक कटाई और कटाई के बाद प्रसंस्करण की तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उत्पादन के साथ गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

FPO और PRADAN की साझेदारी से मिलेगा बेहतर बाजार

हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) को बढ़ावा देने में गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी (FPO) और प्रदान (PRADAN) संस्था की अहम भूमिका है। कोर्रेमुडा में स्थापित हल्दी प्रसंस्करण इकाई में तैयार उत्पाद का मूल्य संवर्धन किया जाएगा, जबकि विपणन की जिम्मेदारी गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी निभाएगी। इससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है।


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