Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के किसानों (Urad MSP Procurement) के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के दौरान राज्य में दाल एवं तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी (MSP Procurement) को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। यह खरीदी मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme – PSS) के अंतर्गत की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सकेगा।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर जानकारी दी है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है और अब तय मात्रा के अनुसार खरीदी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
Urad MSP Procurement पर किन फसलों की कितनी खरीदी
केंद्र सरकार की मंजूरी के अनुसार छत्तीसगढ़ में तुअर खरीदी (Tur MSP Procurement) 21,330 मीट्रिक टन, उड़द खरीदी (Urad MSP Procurement) 25,530 मीट्रिक टन, मूंग खरीदी (Moong MSP Procurement) 240 मीट्रिक टन, सोयाबीन खरीदी (Soybean MSP Procurement) 4,210 मीट्रिक टन और मूंगफली खरीदी (Groundnut MSP Procurement) 4,210 मीट्रिक टन की जाएगी। सभी फसलों की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होगी।
केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि इस निर्णय से तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। किसान अब मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए बाध्य नहीं होंगे और उन्हें बाजार में मूल्य गिरावट का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस निर्णय के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के हितों की सुरक्षा (Farmers Welfare) राज्य और केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने के लिए निरंतर ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार एमएसपी (Urad MSP Procurement) पर खरीदी की सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करेगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस निर्णय से न केवल किसानों की आय में स्थिरता आएगी, बल्कि दलहन एवं तिलहन उत्पादन (Pulses and Oilseeds Production) को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि आधारित आजीविका को नया संबल प्राप्त होगा।


