Baramkela News : सरिया तहसील के कटंगपाली और आसपास के गांवों में वर्षों से डोलोमाइट खदानों (Sariya Dolomite Mining Protest) के जहर से जूझ रहे ग्रामीण अब फट पड़े हैं। “हमारे बच्चों का भविष्य मत बेचो” कलेक्टर साब… यही पुकार अब पूरे इलाके में गूंज रही है, जहां नई खदानों की तैयारी ने लोगों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।
तहसील सरिया के कटंगपाली, जोतपुर, बोंदा और छेलफोरा क्षेत्र में डोलोमाइट खदानों से फैल रहे प्रदूषण, बीमारी और बर्बाद होती खेती की कहानी कोई नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से ग्रामीण जहरीली धूल, दूषित पानी और गिरते स्वास्थ्य के बीच जीवन काट रहे हैं। लेकिन अब जिस तरह से चार नई डोलोमाइट खदानों (Sariya Dolomite Mining Protest) को मंजूरी देने की तैयारी की जा रही है, उसने पूरे इलाके में गुस्से की आग भड़का दी है ।
ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि यह फैसला पुराने जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। जिन खदानों ने पहले ही लोगों की जिंदगी को नरक बना दिया, उन्हीं के बीच और खदानें खोलने की जिद आखिर क्यों? यह सवाल अब हर गांव, हर चौपाल और हर घर में गूंज रहा है।
क्या प्रशासन खनन कंपनियों का एजेंट बन गया है
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन अब जनता का नहीं, बल्कि खनन कंपनियों का एजेंट बन चुका है। सरपंचों से यह कहकर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं कि केवल सूचना दी जा रही है, जबकि असल में यह जनसुनवाई से जुड़े दस्तावेज हैं। इससे साफ लग रहा है कि पूरी प्रक्रिया केवल दिखावे के लिए की जा रही है (Sariya Dolomite Mining Protest)। और सबसे गंभीर बात यह है कि पर्यावरण प्रभाव आंकलन (EIA) रिपोर्ट अंग्रेजी में दी गई है। गांव के लोग इसे पढ़ भी नहीं सकते, समझ भी नहीं सकते। ऐसे में यह जनसुनवाई नहीं बल्कि “कागजी खेल” बनकर रह गई है।
चार नई खदानों का प्रस्ताव, लाखों टन खनन की तैयारी
जारी अधिसूचना के अनुसार सरिया तहसील में चार नई डोलोमाइट खदानों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।
आनंद कुमार अग्रवाल, ग्राम जोतपुर (बोंदा) – 1,20,000 टन/वर्ष
शुभ मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड, कटंगपाली – 1,50,000 टन/वर्ष
मंगल मेटल, छेलफोरा – 1,14,160 टन/वर्ष
बालाजी माइंस एंड मिनरल्स, जोतपुर – 2,00,114 टन/वर्ष
इतनी बड़ी मात्रा में खनन की तैयारी ने ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि यह सीधे-सीधे इलाके को बर्बादी की ओर धकेलने जैसा है।
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Sariya Dolomite Mining Protest 6 अप्रैल को जनसुनवाई
इन परियोजनाओं (Sariya Dolomite Mining Protest) के लिए 6 अप्रैल को ग्राम पंचायत बोंदा में संयुक्त जनसुनवाई प्रस्तावित है। लेकिन जिस इलाके में पहले से खदानों ने तबाही मचाई हो, वहां नई खदानों के लिए जनसुनवाई करना ही अपने आप में बड़ा सवाल है। ग्रामीण इसे औपचारिकता बताते हुए कह रहे हैं कि फैसले पहले ही हो चुके हैं, अब सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है ।
बंद खदानों की हालत देखी है कभी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो खदानें 6–7 साल पहले बंद हो चुकी हैं, उनका हाल आज भी जस का तस क्यों है? कहीं गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं, कहीं जहरीला पानी जमा है, तो कहीं धूल का गुबार लगातार उड़ रहा है। न रिक्लेमेशन हुआ, न पर्यावरण सुधार। जब पुरानी खदानों की जिम्मेदारी तक नहीं निभाई गई, तो नई खदानों को मंजूरी किस आधार पर दी जा रही है? यह सवाल अब प्रशासन की नीयत पर सीधे उंगली उठा रहा है।
बीमारी, धूल और बर्बाद होती खेती
ग्राम बोंदा के तोषराम पटेल और नौघटा के लखन पटेल बताते हैं कि खदानों (Sariya Dolomite Mining Protest) से निकलने वाली धूल ने हवा को जहर बना दिया है। सांस की बीमारी, खांसी और फेफड़ों के रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में सिलिकोसिस जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। वहीं भूजल स्तर गिरता जा रहा है, नदी-नाले सूख रहे हैं और खेतों की उपज लगातार घट रही है। धान उत्पादन में गिरावट से किसानों की कमर टूट चुकी है। ऐसे हालात में नई खदानों की मंजूरी देना सीधे-सीधे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है।
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Sariya Dolomite Mining Protest सवालों के घेरे में प्रशासन
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन को इन हालातों की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें बंद कर ली गई हैं? ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह खदानों को मंजूरी मिलती रही तो आने वाले समय में पूरा इलाका प्रदूषण और बीमारी का केंद्र बन जाएगा। यह सिर्फ एक खदान का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है ।
ग्रामीण बोले- यह खनिज माफिया का खेल
ग्राम नौघटा के सत्यनारायण पटेल ने बताया कि पिछले साल छेलफोरा की जनसुनवाई में भी ग्रामीणों ने भारी विरोध किया था, लेकिन उसकी अनदेखी कर दी गई। अब फिर से नई खदानों (Sariya Dolomite Mining Protest) की तैयारी इस बात का संकेत है कि प्रशासन जनता की नहीं, बल्कि खनिज माफिया की सुन रहा है।
हमारे बच्चों का भविष्य मत बेचो Sariya Dolomite Mining Protest
क्षेत्र के सरपंच भुवन पटेल का कहना है कि खदानों (Sariya Dolomite Mining Protest) और क्रशर उद्योगों ने पहले ही लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। घर, खेत, पानी—सब कुछ प्रदूषण की चपेट में है। ऐसे में बिना किसी वैज्ञानिक जांच और पर्यावरण सुधार के नई खदानों को मंजूरी देना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बेचने जैसा फैसला है ।
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