Rose Farming in Polyhouse : आमतौर पर गुलाब (Rose Farming Success Story) को प्यार और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के एक दूरदर्शी किसान ने इसे अपनी तकदीर बदलने और सफलता का ठोस आधार बना दिया है। ग्राम डुमरिया निवासी किसान भोला प्रसाद अग्रवाल ने परंपरागत खेती की रूढ़ियों को तोड़कर गुलाब की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर न केवल अपनी आय कई गुना बढ़ाई है, बल्कि वे पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरी बन गए हैं। उनकी यह पहल साबित करती है कि यदि सही दिशा, तकनीक और मेहनत का संगम हो, तो खेती भी किसी बड़े उद्योग की तरह लाभदायक हो सकती है।
विरासत में मिली खेती, पर विज़न था आधुनिक
भोला प्रसाद अग्रवाल के पास अपनी पैतृक भूमि थी, जहाँ सालों से धान, गेहूं और अन्य पारंपरिक फसलें (Rose Farming Success Story) उगाई जा रही थीं। हालांकि, इन फसलों में मेहनत अधिक और मुनाफा कम था। मौसम की अनिश्चितता, कीटों का हमला और बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा जोखिम बनाए रखते थे। अक्सर लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था। श्री अग्रवाल इस स्थिति से संतुष्ट नहीं थे और कुछ नया, कुछ हटकर करना चाहते थे। उन्होंने इंटरनेट, कृषि पत्रिकाओं और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क साधकर नकदी फसलों के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया। इसी दौरान उनका ध्यान फूलों की खेती (Rose Farming), विशेषकर गुलाब की ओर गया।
जोखिम भरा फैसला और सरकारी संबल
वर्ष 2023 उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने पारंपरिक खेती को पूरी तरह अलविदा कहकर उन्नत बागवानी तकनीक की ओर साहसिक कदम बढ़ाया। अपने विज़न को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने करीब 2 एकड़ की उपजाऊ भूमि (Rose Farming Success Story) में दो अत्याधुनिक पॉलीहाउस स्थापित करने की योजना बनाई। यह एक बड़ी परियोजना थी, जिस पर लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत का अनुमान था।
इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करना आसान नहीं था। लेकिन, भोला प्रसाद ने हार नहीं मानी। उन्होंने बैंक से संपर्क किया और उनके प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता को देखते हुए बैंक ने उन्हें 90 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया। श्री अग्रवाल ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी से 30 लाख रुपये लगाए। सबसे बड़ा संबल उन्हें राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से मिला, जिसने इस परियोजना के लिए 50 प्रतिशत का भारी अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया। सरकारी मदद ने उनके जोखिम को काफी कम कर दिया और उनके सपनों को पंख लगा दिए।
डच गुलाब की खुशबू (Rose Farming Success Story)
इन पॉलीहाउस (Rose Farming Success Story) को पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया। इसमें नियंत्रित तापमान, आर्द्रता (Humidity) और प्रकाश व्यवस्था (Lighting System) सुनिश्चित की गई। फूलों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने प्रसिद्ध डच किस्म के करीब 80 हजार गुलाब के उन्नत पौधे लगाए। नियंत्रित वातावरण और ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) व फर्टिगेशन (Fertigation – पानी के साथ उर्वरक देना) जैसी वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन तकनीकों के कारण, यहां सालभर निरंतर उत्पादन होता है। पारंपरिक खेती की तरह मौसम की मार (जैसे ओलावृष्टि, भारी बारिश या सूखा) का गुलाब की खेती (Rose Farming) के अंदर कोई असर नहीं पड़ता।
बंपर उत्पादन और विशाल बाजार तक पहुंच
वर्तमान में भोला प्रसाद का यह फार्म सूरजपुर में आधुनिक बागवानी का एक आदर्श मॉडल बन गया है। यहां से प्रतिदिन औसतन 3 से 4 हजार प्रीमियम गुणवत्ता वाली गुलाब स्टिक का उत्पादन हो रहा है। श्री अग्रवाल ने केवल उत्पादन पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि मार्केटिंग की भी मजबूत व्यवस्था की। तैयार फूलों की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि इनकी मांग केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। वे अपने फूलों की आपूर्ति सीधे बनारस (उत्तर प्रदेश), ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न प्रमुख बाजारों (जैसे रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर) में करते हैं।
खेती बनी उद्योग, हर माह लाखों का मुनाफा
इस आधुनिक और वैज्ञानिक खेती (Rose Farming Success Story) से भोला प्रसाद अग्रवाल को हर माह औसतन 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय हो रही है। यदि सभी खर्चों पर गौर करें, जिसमें श्रमिकों का वेतन, खाद, उर्वरक, बिजली, परिवहन और रखरखाव लागत शामिल है, तो इसे निकालने के बाद भी यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह उनके परिवार के लिए नियमित और मजबूत आमदनी का एक विश्वसनीय जरिया बन चुकी है।
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श्री अग्रवाल अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि पारंपरिक खेती (Rose Farming Success Story) पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहती है, जिससे जोखिम बहुत अधिक होता है। एक बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि पूरी फसल बर्बाद कर सकती है। वहीं पॉलीहाउस तकनीक ने इस जोखिम को 90 प्रतिशत तक कम कर दिया है। नियंत्रित वातावरण में उगाए गए फूलों की गुणवत्ता बहुत बेहतर होती है, तना लंबा और मजबूत होता है, और फूल का आकार व रंग आकर्षक होता है, जिससे बाजार में उन्हें हमेशा अच्छे दाम मिलते हैं। वे कहते हैं, “यदि नई तकनीक अपनाई जाए, वैज्ञानिक सलाह ली जाए और शासन की लाभकारी योजनाओं का सही समय पर लाभ लिया जाए, तो खेती को भी किसी सफल उद्योग या व्यवसाय की तरह विकसित किया जा सकता है।”

प्रेरणा और रोजगार का स्रोत (Rose Farming Success Story)
आज भोला प्रसाद की यह पहल न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि उन्होंने आसपास के ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। उनके फार्म में एक दर्जन से अधिक लोग नियमित रूप से काम करते हैं, जिससे गांव में ही उन्हें आजीविका मिल रही है। सूरजपुर में गुलाब की खेती (Rose Farming in Polyhouse) का यह आधुनिक मॉडल अब दूर-दूर से आने वाले किसानों, कृषि छात्रों और अधिकारियों के लिए एक अध्ययन केंद्र बन गया है। भोला प्रसाद अग्रवाल की मेहनत, सही योजना और आधुनिक तकनीक के संगम से लिखी गई यह Rose Farming Success Story अब पूरे छत्तीसगढ़ में प्रेरणा फैला रही है और यह साबित करती है कि कृषि क्षेत्र में भी अनंत संभावनाएं मौजूद हैं, बस जरूरत है एक नए नजरिए और आधुनिक दृष्टिकोण की।
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